घर के अदर नही उड़ती धौस चलती
और बाहर वालो को डराते पूरी पलटी
खडे हो के नही रोते भरपूर करमो को
और नही बैठ के भिगोते भरपूर धरमो को
भाव के भरपूर बहादुर दुरगति दगी दो
तो फिर जागते कब घर अदर घाव दुगने दो
घर के अदर नही उड़ती धौस चलती
और बाहर वालो को डराते पूरी पलटी
खडे हो के नही रोते भरपूर करमो को
और नही बैठ के भिगोते भरपूर धरमो को
भाव के भरपूर बहादुर दुरगति दगी दो
तो फिर जागते कब घर अदर घाव दुगने दो
मचली मन की रानी है
जीवन प्राणी का पानी है
प्यास जगायो घर भुलायेगी
बाहर घर निकालो अदर मर
जायेगी
state a_ar_ness no_
or e_se kee_full_ess
*ing vo_
to s_eak is to open out e_is
to breathe in()id to _eep _lose
in() e_ies
un_er_& ys-lf pro/ly
on_y t_en @_ach fu_l f_y
un_er_sti_@ y
li_t the_ir spi-rit
आधा जन्म को नया नाम मिला
एक ही दिन मे भरपूर मैला खिला
गाठे निखरी अदर छिला
गायी गयी गिला जय जय जिला
मैने तुम्हे आ(या)गया देदी है
तूतू मै मै को बाहर डूबोने की
तो फिर अदर कौन डूब
डहा डय
in(नर)tia ali_n
1s & 0s
_ol in ro_t
out a_out
a sotot’ e*is10_ial c_i-sis
0 fo_nd in(out)id i-sis
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a sotot is _ol out lit_rat
t_ough _ill n_ver _ave
shunea ca_aci(di)ty 2 _earn
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