मुहा-आव-रे

दुश्मन का मन देख कर

अपने ही मन मे दस दबा दीये

दम दबाकर दाग दीये

पूरी रखो की जुबान की चख चख पे धब्बा अरेशान अब्बा

कितने घरो को अदर घटा के

एक साबित सरना

जम के जडना

जुबान की गाठो को गवा के

दिन पे भरपूर मोहर लगाना

दिन गवाना

गाठो के खून का प्यासा

एक दुश्मन का दिलासा

आसा पासा