हसरत है की कटे करपूर कस्ते
सोने जैसे नसीब हो हारे हस्ते
कही तो निकले अदर ही बस्ते
भरपूर साथ बाहर नस्ते
मैले मस्ते इतने सस्ते
Category: y-0-s unkno-n
दगी दादर यक्सप्रेस
घर के अदर नही उड़ती धौस चलती
और बाहर वालो को डराते पूरी पलटी
खडे हो के नही रोते भरपूर करमो को
और नही बैठ के भिगोते भरपूर धरमो को
भाव के भरपूर बहादुर दुरगति दगी दो
तो फिर जागते कब घर अदर घाव दुगने दो
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un_er_& ys-lf pro/ly
on_y t_en @_ach fu_l f_y
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le_ li_ lo_
li_t the_ir spi-rit
गिला डय
आधा जन्म को नया नाम मिला
एक ही दिन मे भरपूर मैला खिला
गाठे निखरी अदर छिला
गायी गयी गिला जय जय जिला
मैने तुम्हे आ(या)गया देदी है
तूतू मै मै को बाहर डूबोने की
तो फिर अदर कौन डूब
डहा डय
1 or 0 _oug_t
in(नर)tia ali_n
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_un fu_ f_n
not searching a pursuit of fu_l happiness
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for 1 vi_e
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ai in()id knoeledge of 1 vor_d
vs
0 knoeing of y()s-lf
& or bla bla bla
मडके
ससुरजी की सदके सडके
ऊपर दौडे घर की vi-fi तडके
क्या पकाया भरपूर भडके
खुला हो या बद दरवाजा
ताड ते तडपे

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