a bo_i & ind un_ung
re()adi for s_r8 in()id p_un_e
a bo_i & ind un_ung
re()adi for s_r8 in()id p_un_e
_un fu_ f_n
not searching a pursuit of fu_l happiness
1 enjoying _ol purpose of 1 ys-lf fu_l li_e
@ present 1 continuing into
future 0 re_ent ri_
that which is em_tee
in(out)id
a knoeing of to()tal
emptee self
_ile in(नर)trudging th_ough
ai in()id knoeledge of 1 vor_d
vs
0 knoeing of y()s-lf
& or bla bla bla
ससुरजी की सदके सडके
ऊपर दौडे घर की vi-fi तडके
क्या पकाया भरपूर भडके
खुला हो या बद दरवाजा
ताड ते तडपे
गोदी को नहीं कोई तकलीफ
इधर उधर खुद भटके शरीफ
दूयीया की भरपूर तशरीफ़
भरपूर साथ अदर भरपूर
चीफ
अदर नही मौत दुखती
बाहर क्या सौत सो सकती
ससुर जी को कौन रोके
दामाद की भरपूर बकती
जुबान का एक मरद शौचालय मे नही बैठ सकता
और दूयीया मे एक जुबान को फटा फट फकता
बाप रे बरद बो()ता बकता
जू खोटा
बाहर का पाप पाप पाप
खुशी से हुया अदर मिलाप
निकरे कितने काया काप
जो न झुका बुरा बाप
झुका आप
समय भाग रहा है और
तब क्या होता जब अदर
आ गया समय का सोता
तो बैठो आयना खो चला
टोटा
मौत की भरपूर नीद सोते
सुबह को बाहर भरपूर धोते
निखरी सास अन्नजल डूबोते
मौत का साया न साढे सोटे
y ho_se is _issing a sec_et fu_l co_ner
in()id y ho-me that vic_ is
1s & 0s
li(_ar)ra_y
do-m
तुम्हारा घर चलता है भरपूर बहाने से
रोज के साढे तडके ताडने रुलाने से
समाज के बहाने अदर सास भूलाने से
लुढका शरीर इधर उधर छपकाने से
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