घर के अदर नही उड़ती धौस चलती
और बाहर वालो को डराते पूरी पलटी
खडे हो के नही रोते भरपूर करमो को
और नही बैठ के भिगोते भरपूर धरमो को
भाव के भरपूर बहादुर दुरगति दगी दो
तो फिर जागते कब घर अदर घाव दुगने दो
घर के अदर नही उड़ती धौस चलती
और बाहर वालो को डराते पूरी पलटी
खडे हो के नही रोते भरपूर करमो को
और नही बैठ के भिगोते भरपूर धरमो को
भाव के भरपूर बहादुर दुरगति दगी दो
तो फिर जागते कब घर अदर घाव दुगने दो