बाहर के जग के आड़े को अदर ला के जुगाड़ को बाहर धोते है
जग जग जियो तूतू मे मे लाल के रटे रोते है
बाहर के जग के आड़े को अदर ला के जुगाड़ को बाहर धोते है
जग जग जियो तूतू मे मे लाल के रटे रोते है
यानि की एह लो
ख़ाली मान लो
ध्यान नहीं है
निकाल दो
आखे गम है
रुमाल लो
सर पे चढ़ा ले
बाल पहले गिरा लो
_oor lit_le i a_wae _ets no s_o
that’ 0 okae mo
y-0-s in()id u min_ful_ess hu-man to su/hu-man e*pan_ion
@ _ate of gut surface()all na_ure’ su/ _ood
0 2 be_ome su/ 0 de10tion
सारा कसूर जरूर तो भरपूर सास दवा(या)रा किया गया
वेदो की व्याखिया का भरपूर अनुशासन है
जब देखो _ast_ime * 2
अब सास को अपना _ast_i-me भी तो भरपूर प्यारा है
इसी लिये अदर ही व्याखिया का भरपूर नज़ारा है
बाकी तूतू मे मे की दुनिया जाये चाहे भरपूर एक झाड़ मे
मुझे तो अदर की पूरी ज़िन्दगी अपने आधा के साथ ही गुजारनी है
इस बात का पूरा यहसास है मुझे
उससे सृष्टि गोदी में जितनी सासे कड़ी होनी
है भरपूर खाद जाये
गोदी के दिन का आधा अंत होता देख सास को भरपूर चैन मिलता है
लेकिन दुनिया मे किसी एक का अंत अदर नही रात रोता
तो लय बाहर भार भरपूर भोता
और
अनंत रात को कभी न छूता
तूतू मे मे की दुनिया की एक-एक बिमा(या)रिया
तो है बिन मा की सास अदर त्यार-रिया
और बाहर भरपूर प्यार-रिया
भरपूर सास के अदर का एक-एक का अंत ही
पूर्ण एकांत
सारा गोदी का ख़ाली सिध्दांत
आखे हुई पूरी मृतान्त
@ time of dis_olution ever-i-thing me_ged in-to _ater
अब y-0-s in()id u का wa_er तो बीमा(या)रिया dis_olve नही कर सकता
तो फिर बीमे खोलने का उद्घाटन gut के अदर की
या-रियो के सूखे से ही करा लो
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