फूली फली गोदी ख़ाली साँसो का धनि
शक्ति को पिलाते नारा का पानी मणि
आँखों में पूर्ण मईया की धवनि
गूंजे अंदर साँसो का ऋणी
ब्रह्माण्ड देखे इधर उधर
गोदी के आधे अणि
फूली फली गोदी ख़ाली साँसो का धनि
शक्ति को पिलाते नारा का पानी मणि
आँखों में पूर्ण मईया की धवनि
गूंजे अंदर साँसो का ऋणी
ब्रह्माण्ड देखे इधर उधर
गोदी के आधे अणि
गोदी नंदणा
शिशु वंदणा
ढे-से मिट्टी मा मन
ऐसे आधे आ अंदर अन्न
बने है तो बाली बुरा बन
नहीं न नूर नदिया नन
ज़मीन के हरे हारे
आसमान के तरे तारे
बीच मे मिले मझधारे
गोदी मे ख़ाली लुटाए
कलीरो कली कारे कारे
झलकते जीवो आत्मा आरे
ख़ाली सांसो का जहा()ज जी आधे आ घा()रा घर घा
आज कौन से ज़मीन-आसमान
मिलाने माया मय घेरा घा
गोदी आँखे ख़ाली खाम खेहती
एकांत न बोल सके वैसे सेहती
ऐसी शक्ति शांत-शाली शहती
माया मोह मोले मुख मा मेलती
अब ला गोदी की क्यारी
साँस सरोवर सुरो सु-रा-री
रारी रात पिरोए बिंदी कुँवारी
साथ साथ साये नींदी न्यारी
उजळे आधे ऊ-ला आधा वरो वारी
गोदी में अंनगिणत अन्न-गणित ख़ाली आधे
सृष्टि की कल्पना कागे ख़ाली खागे
अनंन्त में लींन आरे-वारे न्यारे नागे
ख़ाली ध्वनि धे धींन धन्धु धा धागे
रिसकी राद में दिन रात ख़ाली खोए
वही सांसो के ख़ाली आँसू पिरोए
ख़ाली बंधन बांध भीतर भिगोए
साँस भी तैरे सारे असीस सोए
ख़ाली जोत गोदी की बहार बोए
सृष्टि मईया की गोदी में हमारे सोने की नईया
नदी तैरती ताए घर का ख़ाली खिवईया
नौका सांसो की भीतर ख़ाली सहज सिवईयां
अंतर्लीन अंदर आँखे विभोर ख़ाली अईया
काल्की बिछाए ख़ाली आधे पालकी
दुल्हन की सृष्टि ख़ाली गो()का लाल की
डोली की ढाल अंदर ख़ाली लकीर धरो की
ख़ाली उठाए साँस का सौभाग्य चार कंधार की
भीतर ही तरी ख़ाली साँस उद्धार की
आधा झांके हाँजी हाँजी ख़ाली रजा उध्हार की
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