धनि धनि

फूली फली गोदी ख़ाली साँसो का धनि

शक्ति को पिलाते नारा का पानी मणि

आँखों में पूर्ण मईया की धवनि

गूंजे अंदर साँसो का ऋणी

ब्रह्माण्ड देखे इधर उधर

गोदी के आधे अणि

काल(चक्र)की

काल्की बिछाए ख़ाली आधे पालकी


दुल्हन की सृष्टि ख़ाली गो()का लाल की


डोली की ढाल अंदर ख़ाली लकीर धरो की


ख़ाली उठाए साँस का सौभाग्य चार कंधार की


भीतर ही तरी ख़ाली साँस उद्धार की


आधा झांके हाँजी हाँजी ख़ाली रजा उध्हार की