मूषक राज की स्वा()री है महा विद्या की ख़ाली आरी
धीरे धीरे गोदी मे आए ख़ाली गंध की राज दुलारी
गोदी मे सारी खिले अदभुत ध्यानी की ख़ाली क्यारी
दिखे जहा जहा वहाँ है सृष्टि मईया की गोदी प्यारी
मूषक राज की स्वा()री है महा विद्या की ख़ाली आरी
धीरे धीरे गोदी मे आए ख़ाली गंध की राज दुलारी
गोदी मे सारी खिले अदभुत ध्यानी की ख़ाली क्यारी
दिखे जहा जहा वहाँ है सृष्टि मईया की गोदी प्यारी
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जब सूर्य का आधा कण गोदी के अंदर आ जाए
तो क्या होगा
भरपूर गलेगा और ख़ाली घुलेगा
ख़ाली अनु का गोदी मे मान नही रखा
तो फिर आज भरपूर आन()धान की
सास अदर कैसे गलोगे
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जब सास को अंदर मौत आती है तो
बाहर के शरीर को दफना या जला दिया आता है
जब भरपूर सास मर के अंदर ही ख़ाली जाग जाती है
उसके अंदर के भरपूर धढ़ अपने आप ही पूरे धढो को दफना देते है
या फिर ख़ाली अग्नि मे जल आते है
क्या हुआ
तुम-हरी सास मर-मार-मर के भी भरपूर भारी बीमा()री
मा-पने अदर के ज्ञान को छू नही सकते
और बाहर दिखावे करते है भरपूर -यान के ऊ()चा को
बुरे-बुरी तूतू मे मे की दुनिया के एक वक़्त मे भरपूर सास का काम एक ही होता है
मि-लायो भरपूर
यह क्या-क्यो लगा रखा है ऊची ऊची
अपवित्र असुरो ने अपने अदर ही भरपूर मदर
मनोरजन का अभाग्य निर-जन
शुरू करो दिन रात विसर-जन
अत ना भरे भरपूर दत-म()जन
ख़ाली सांसो को दिखाना-सुखाना भी क्या जरूरी होता है
ल-लो लान लो
गोदी का ख़ाली ज़माना भी सारा पुराण माना ख़ाली होता है
भीतर ही बहे ख़ाली आम सारा संसार धोता है
आप को कोई हरा नही सकता
क्यो
तो असुर क्या भरपूर पीला परते है
याद रखे
आप बहुत ही विश-all के भरपूर श(वे)श के अदर पूरे भरपूर वि()शेष है
भरपूर कार्य अदर ही अ()धा न()रेश है
अपवित्रता क्या अग्नि की भरपूर जलन को कम करती है
तो फिर किसे पवित्र भरपूर भड़काती है
काला चश्मा उतारते ही भरपूर बहुत साफ़ लिख रहा है ना
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