y _ust & _reed b_inging _ol _@_iet-y in()id u is
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wit()in _ap of na()ure’ em()tee _ile
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an em()tee mother never _rings off(c)end for a c_ild is kic_in _egs in()id wom_
for y chi_d is _earning to di_ect on man’ _ol si_ _tic _ith &s un_war in()id tom_
for u _ill _ever _av total ca_aci()ti of /cep_ion to _eel wit()in c_ild kic_in wit()in _omb
भंजूस भूरा भरपूर भसुर
भरा भरा भारी भरपूर भटूर
भडार भरे भरीर भरपूर भातुर
y-0-s की राक्षसी ख़ाली राज()मारी के क्यों नही खा पायी
चांदी की छड़ी को सुला दी
सोने की छड़ी को जगा दी
और फिर भरपूर घर के अदर आ के कहती
मुझे मनुष्य की गद आ रही है मे खायू
अब टेडी लात सीधी बतायो
मनुष्य को कभी राक्षसो की गध नही आयी
क्या लाते भी टेडी होती है
आधा जन्म का नुक्स पिरोती है
क्या
अपवित्र असुर दुनिया मे गिरे एक नही होते
तो क्या इंसान भी गोदी मे पड़े ख़ाली नही होते
भरपूर समदर अदर बह नही सकता
_ait रेहा कर है पूरा भरो
अपवित्रता के अदर छूने की
भरपूर अपवित्रता अपने आप ही असुरो के अदर हरी जाती है
अपवित्र सरलता से परिवार की सस्कार भी भरपूर पवित्र धोते है
भरपूर सच मीठी बात है जो अदर अपवित्रता का घोल उपवास है
हमेशा से ही बिना पहचाने अदर छिपे राज अपवित्र पूजते साज
अपवित्रता को बिखरने नही देगा ख़ाली महा-आम का इत-वार
अपवित्र असुरो के सघर्ष की एक राह-चाह गोदी का ख़ाली बदल देती है तार
भरपूर रात की ख़ाली जग भरपूर जीत कर ही अपवित्रता पूरा दिन चमक()ती है
सृष्टि गोदी के अंदर
एक एक ने हर सदी के अंदर की दुनिया ही बदल डाली
इसी लिये अपवित्र असुर घर-घर का बदला भरपूर डाल वाली
ਤਦਿ ਤੇ ਸੰਸਾਰ ਵਿਚ ਕਿੰਨੀਆਂ ਦੁਨੀਆ ਪੈਦਾ ਹੋਈਆਂ ਤੇ ਮਿਟ ਗਈਆ ਸਵਾਲੀ
ਇਹਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਨੇ ਬਦਲੇ ਦੀ ਲਹਿਰ ਪੂਰੀ ਇਕ ਭਰਪੂਰ ਕਵਾਲੀ
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