सूर्यास्त पूर्ण साँसे मस्त
शाम घुले अंदर जबरदस्त
धारे धरे तमाम हाथा हस्त
शय्या में साँसे हम बंदोबस्त
सूर्यास्त पूर्ण साँसे मस्त
शाम घुले अंदर जबरदस्त
धारे धरे तमाम हाथा हस्त
शय्या में साँसे हम बंदोबस्त
यह दूयीया की सासे क्या लिखती है
हम बने तुम बने एक दूजे के लिये
तो ख़ाली बल मत
हम एक है — तुम दूजे हो
तुम नक-भी नेक नही नो
not th_oe ys-lf in(नर )2 1 _it
—
a b_eat_ing is a war_ior
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c_ear _ield
दरवाजो की लाड़ी लकड़ी
गूंजे गली जाल जगजड़ी
गोदी आन म्यानि मकड़ी
खाला खू()ले ख़ा()ली खकड़ी
an emptee in()id breathing
a total peace of mother
nature’s wiw o
emptee arth
मूह(की-जुबान)बारक बो
दगी के जिन जिन आगे बडायो
—
हमारी ज़िन्दगी अंदर ख़ाली बंदगी
a subjective is unaware
in(out)id
—
an objective is aware
wiw o
a gut emptee detox
4
shunea breathing
_ox
al1 u _id dest_oy
nature’ godi magnetism
_veaked _ill de_ail y
vor_d’ in()id
n_pot-i_m
आखो को मंडला-लिट नज़र आया
दूर दूर दरवाजा टूटा सुकूम साया
एह कैसा इन्साफ सुलभ हमने पाआ
गोदी के दुःख सुख में हिस्सा आया
अंदर बढ़ते बड़ो ख़ाली बाया
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