आज से शुरू हुया हर जुबान का ताला
नही खुलेगा कलयुग का हिम्मतवाला
रखना अदर सास कदम कम काला
चाबी चाव चुप चढ़ी चार चाला
ख़ाली बहेगा अंदर का रूखा रखवाला
धरती की गोद हरी-आली आधे ज्वाला
आज से शुरू हुया हर जुबान का ताला
नही खुलेगा कलयुग का हिम्मतवाला
रखना अदर सास कदम कम काला
चाबी चाव चुप चढ़ी चार चाला
ख़ाली बहेगा अंदर का रूखा रखवाला
धरती की गोद हरी-आली आधे ज्वाला