ख़ाली खून खहो
मस्त मंदर मरो
गोदी के गुण गहो
सांसो से शास्त्र सहो
Category: innate
गली गली ख़ाली मली
सृष्टि गोदी में कुत्ता भी शेर होता हा
घर के अदर असुरो की जुबान का
हेर फेर गडगूर गोता गा
बर बदलो बति
आया आधा जन्म जाती
सब कुछ कितना नया नया नगा नाती
आधे का राहु-केतु भी ख़ाली खो देता
ख़ाली कब्र भी इधर उधर रो रेता
बुँदियाँ रखवाली अंदर बाहर नाचे नचिकेता
ज़रा सी ख़ाली समझदारी दे गोदी देती सब सुला
रही बात घर बदलने की तो
गोदी में घर एक दिन में नहीं बदलते
कितने भरपूर आधा जन्म भटकते
तूफानी रात मे भी न अदर रोते
दिन्दा दिली से रूह को दगते
समा(दा)ज आज नही बदले बाते
जल्दी जला
हमें तो कुछ-कुछ समझ सारा
यह शाति बायी क्यो उकसा रहा
हमें ही घर से बाहर निकलवा अहा
इस के तो काल के अदर कूडा काला
बहुत कुछ मिल—-भगत सगता साला
घर है दगना उछाल जल्दी वाला जाला
इसने सब है घर के अदर पता लिया
हम क्या करते है हर रोज पिया
देखे ध्यान से धार न धरे दिया
क्या उपाये है अंदर जिया
घर का मालिक ही न सुने
अनसुने आधे ध्यान धिया
त्यार तरो
हमें तो करनी है गोदी की ज़मीन हरी
जो भी इसमे आया करपूर करमो का कमाया
भरपूर भय से भूरा भाया
हमें मोह-माया के ख़ाली ने समझाया
अब आन से है लड़ना घर के अदर झडना
कैसे कहे कितना कम कहा करना
a test
_his h_use is fa_ing _est
so u wa_ch su_set ever_dae _oing res_
& _id 0_ing in()id ar_est
ever- -thing bec_me 0_ing _a_it for ever-y1′ t_ing
ju_t wei__ing
केवल का-धा
आधे केवल्य
के समाने
आधा आमने आना
सम्पूर्ण स्वीका()र्य
गोदी ख़ाली अणु परिवार
है बनवास अंतर्मन स्वीकार
आधा-आधे ध्यान धरो दी(वा)दार
सृष्टि गोदी हरी(नि)राली आशीर्वाद
शि()कार
आमने सामने का शिकार
चुप छाप ख़ाली मजधार
बुँदियाँ का ख़ाली खुमार
आधा क्या है दिन्दा दिल्ली
नही अदर बाहर त्यार
आधा आधे
दो लफ्जो की है गोदी की ख़ाली अहा-आणि
इसमें न कोई राजा न रानी तोपफानी
आधा दिन ध्यानी आधे रात रूहानी
दिन रात आसमान आम भवानी
आ लेले ख़ाली खज़ा खवानी

You must be logged in to post a comment.