आधे की पालकी
लय गौ()का लालकी
आधे की पालकी
लय गौ()का लालकी
गोदी के गाल gut ब्रह्माण्ड के बाल
कब कटे कंधार के कु-रख़त काल
योग भरपूर माया ख़ाली खाखन खाल माल
जगराते जब जगे अंदर जागो जय जया जलाल
ख़ाली मुहूर्त हेख खे खलियुग खा दिन दायां
आधे ख़ाली गिन गिन अंदर बाँवरी बायां
रात भरपूर रू-गले दिनरैन ख़ाली दिलाया
आधे ही अड़ा ते अड़ाया ख़ाली खाया
काल्कि का अंदर ख़ाली अवतार
gut मे प्रलय की लय का उप-चार
पुराणों मे न दिखा लिखावट का ख़ाली नार
सांसे ख़ाली अंदर अनंत आर-पर
ख़ाली घर अखंड भीतर आधार
ख़ाली टेक धरो दिव्यां-ज्योति के ह(र)जार
गोदी के अमृत के लिए
असुरो और सुरो के बीच में सुर-आ()गर मंथन
सुरो के हाथ है केतु की पूँछ (नहीं होगी सफ़ेद मूंछ) और असुरो के पास राहु की धड़
(आगे से पकड़ पीछे है जकड)
तभी तो जब-अब देखो
तूतू मे मे दुनिया का एक दिन तू खुद ही
सास की धड़ ख़रीदेगा या खरोंदेगा
अपवित्र असुर
घर के अदर ही सास रौदेगा
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी
सृष्टि गोदी की जननी का पूर्ण ज्ञान साँस का ख़ाली स्वर्ग (स्वर का गर्ग) संपूर्ण वर्ग
for u _in’t e*/i()ence no()thing
_et to com in()id o_hing
wit_in _ap of nat-ur to()tal s_ing
tran__end in(out)id em()tee _ing
a s_ern @tu()n be_o-me _ated re_lit-ee of in()id _urn
for _e_t_une to a_in wiw o fe()n
as nothing within so without ever-i-thing
as ever-y-thing in()id so out()id nothing
no _@ter ever-y-thing u cre_ate f()om in()id _ind_ull_ess _ound
to()tal nothing re()_on-ates wit()in aum()tea ()ound
आधा जन्म का एक (आ-जा)ना तो आगा ही रहेगा
शुन्य gut का भु(आ-ला)ना भरपूर एक-एक को ख़ाली रुलाएगा
हर आधा जन्म में
गोदी मईया रा १ आया है
आधे ईतय से आदि आरणि आ
0 mae _is em()tee f()og
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