सृष्टि गोदी की ख़ाली ज़मीन में
आत्मा(तत्व)शक्ति की जरूरत ख़ाली सांसे
अंदर-बाहर धहलती धारे ख़ाली झांसे
इधर-उधर अटकाए ख़ाली फाँसे
टेक टिकाएं दाएं-बाएं ख़ाली दिलासे
सृष्टि गोदी की ख़ाली ज़मीन में
आत्मा(तत्व)शक्ति की जरूरत ख़ाली सांसे
अंदर-बाहर धहलती धारे ख़ाली झांसे
इधर-उधर अटकाए ख़ाली फाँसे
टेक टिकाएं दाएं-बाएं ख़ाली दिलासे
सृष्टि मईया की गोदी अंदर आधे
ख़ाली महा(अनु-आन)बारक
मईया ने हाथ बांधे बरखाया
माखन इधर उधर गुर्राया
साँस की तरेडों तो ताली
तिल्ली ताया तर्राया
गोदी के काल्कि को है ना इंतज़ार
सृष्टि की कोख का ख़ाली खल कख-वार
तुम-हारे अदर भरपूर त्रिकाल का अंत-कार
ना लौटाए अंदर तरपूर तरो ताली ताल तार
नही आया य-कीन भरपूर भहाली बे-हाल ब-हार
अकलिष्ठा-कलिष्टा
0 _ol _ain_ul
वैराग्य ख़ाली वही वि-योग अदर भरपूर भाग्य
un_olor 2 em_tee _ull 0 co_or
a gut ब्रह्माण्ड’ mother nature has to()tal _ap for wit_in chi_d
to br()ath , _rae, _est
an in()id total _est for out()id em()tee un()doing _est
सृष्टि गोदी की कोख में आधे अभी लाते तारनी तीख तहा ता
हाँ गोदी कोख ख़ाली आधे बाहर नहीं निका(ह)लेगी
ख़ाली सीख सही सा आधे जमन जही जोगा
ख़ाली खोज्या ख़याली खोला
ख़ाली काल्कि के विचार है कहा दर्ज गोदी के ख़ाली धर्म उपचार फर्ज
आधे पुराण (हरि)आळी आर आधा प्राण पूरे पार
क्युकी 2 काल्कि
आधे है काल की सारी ख़ाली छईया
तुम आके अपनी मे ढूढो भरपूर बईया
mir(or-a)cle की चाहिए दईयां
गोदी का गमल तो ख़ाली कीचड में ही खिलता
गांठ गड़े गढ़ों गा गईयां
सृष्टि मईया की गोदी में हमारे सोने की नईया
नदी तैरती ताए घर का ख़ाली खिवईया
नौका सांसो की भीतर ख़ाली सहज सिवईयां
अंतर्लीन अंदर आँखे विभोर ख़ाली अईया
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