तुम्हारा घर चलता है भरपूर बहाने से
रोज के साढे तडके ताडने रुलाने से
समाज के बहाने अदर सास भूलाने से
लुढका शरीर इधर उधर छपकाने से
तुम्हारा घर चलता है भरपूर बहाने से
रोज के साढे तडके ताडने रुलाने से
समाज के बहाने अदर सास भूलाने से
लुढका शरीर इधर उधर छपकाने से