धोखा धफी

हम अपने पैसो से जुबान के समाज को

दुयीया की सैर कराते

बेशरम येश हम बनाते

अन्न ने न हमें छुआ

जो भी खाया भरपूर भुये

चडा चू चू चुया चुया

आखे धडी धोखे धुया

न बैठे अदर रुया रुया

मुहा-आव-रे

दुश्मन का मन देख कर

अपने ही मन मे दस दबा दीये

दम दबाकर दाग दीये

पूरी रखो की जुबान की चख चख पे धब्बा अरेशान अब्बा

कितने घरो को अदर घटा के

एक साबित सरना

जम के जडना

जुबान की गाठो को गवा के

दिन पे भरपूर मोहर लगाना

दिन गवाना

गाठो के खून का प्यासा

एक दुश्मन का दिलासा

आसा पासा