चलती फिरती जि-दगी को अदर
बैठी या ख()डी मौत नही मिली
तो बल मत दिल की जिदा मरजी
जी तो मरा ही रहेगा हाजी
आगे यडो यरजी
उज्जवल आला
आज से शुरू हुया हर जुबान का ताला
नही खुलेगा कलयुग का हिम्मतवाला
रखना अदर सास कदम कम काला
चाबी चाव चुप चढ़ी चार चाला
ख़ाली बहेगा अंदर का रूखा रखवाला
धरती की गोद हरी-आली आधे ज्वाला
ख़ाली खाज
तुम-हारी सोच का समाज
बदी बनाया अदर भरपूर दाज
तुम्हे न समझ साया नवमी नाज़
काले करे काखे काटे काया काज
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start y 0 mo_ning s_ape y 1 everyday healthy
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भरपूर भावरा
मिले सुर मेरा तुम-हारा
तो सुर बने जहा(भरपूर)यारा
अदर दग्गियो का दवारा
निकला देश बाहर कुवारा
मिले न इधर उधर सहारा
कानो का कमरा कारा
an emptee gut -shunea- within womb

t_eak _eak
1 hea_t b_eak 0 _art _re_k
he _ach _eak
बरपूर बिल
दिल भरपूर टूटे
टोटके बाजार लूटे
हाल हजार तुमदुम छूटे
बद ही अदर भरपूर फूटे
खुला न बाहर बहाये टूटे
आधे गईआ
ख़ाली बुँदिऊ की सृष्टि मईआ
बुँदिऊ में सृष्टि ख़ाली स्वाईआ

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