ज्ञान जो अनजान बनाये
अनजन कैसे महान लुटाये
अदर अपमान गहरा बड़काये
बाहर सीखो उचाई जगाये
ज्ञान जो अनजान बनाये
अनजन कैसे महान लुटाये
अदर अपमान गहरा बड़काये
बाहर सीखो उचाई जगाये
जुबान के उडते हुये समाज की सकती
कैसे छुयेगी जमीन पे बैठी ताकत तकती
तो ले आयी बाहर भरपूर भक्ति
मिलवाये अदर मुक्ति
सास रूकती
दाग दुखती
जाग झुकती
u p() f_om in()id
not _ump-ty pu_
for so_ie-ty’ is out()id
1 dum_ty _up
1 _ar(in-t_i)guing wit_ out s_a_oe
no_s so_ie-ty in()id l_t u
_in me-ado_
_ot bu_y s_o_ly 1 u_n loe_y
no_ lo_e ur_ 1 ne_er _urn
on-ce u _ar d1 re()a-li-sing ab(rupt)out
real is _it r(ural)ake
a m_r-ror awa_e
हमारी आँखों ने छुआं
दिल रूएं रूआं रूआं
घुमड़े बादल धुआं धुआं
उमड़े आदल दुआं दुआं
वैराग्य को है आज्ञा
बैर को मिले भाग्य
गिरे इधर उधर दुरभाग्य
मिलायो सो भरपूर राग्य
_ar u as_ li_
as mos_q_it_
a hu(1)man _eing
2
sin_le ce_l bein_
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