द-खा

द-खा जुबान का नक्शा देखा है

इधर उधर दौड़ता धोखा है

चाल चलन सास का अनोखा है

कहा कहा से उठा के लाये

खो()खा है

मचान

बुँदियों को करे बदनाम

सास के अदर सीना तान

बहरा बिकायू बूढ़ा बान

हाथो मे समाज की जान

भरपूर दिखाए ये पहचान