कलयुग के या()त्रियों को
आधा जन्म के भरपूर दिन-रात
अंदर बीमा(या)रियो की
शुभ-काम-न-आये()
कलयुग के या()त्रियों को
आधा जन्म के भरपूर दिन-रात
अंदर बीमा(या)रियो की
शुभ-काम-न-आये()
भू-का प्यासा आधे कितना भरपूर भैभीत है तूतू में में की दुनिया की तूतू से
gut गोदी के ख़ाली शेर से कहो पूरा li-on
y in()id u do hav 2 *_ress gra-y-ti(mul-ti)tud of y in__tion
in-su_icient use of po_ent- lo-ti-on
आधे बूंदियो के ख़ाली बैठने से कितनी जलन होती है भरपूर वेहले को
हर वक़्त gut सृष्टि को भरपूर नाम-आम (b_am )
आधे तो जैसे तो गोदी का भरपूर विनाश-व्या-कारन हो गया
बचो यह है दांतो की बनावट
दांतो की चमक नकली है
मेटर जी
कहते है रोगी को बैठना नहीं आता
भिड़ता रोग भगाना भय भाता
इधर उधर एक नहीं इत-राता
इतना भी नहीं ध्याता
बैठा रोग भीतर मु-खोटे लुभाता
तुम्हारा भगवन मूर्ति के अंदर ख़ाली है
gut मईया आधे की आँखों के अंदर ख़ाली रखने वाली रखवाली है
भरपूर के रहते कलयुग के भगवन को तो gut मईया मिलने से रही
,जा फिर बाहर कर दी गयी ,
इसीलिए भूखी नींद ही सो रहा है
कितने छोटे लोग है gut गोदी के छोटो के लिए छोटा ही सोचते है
इधर उधर के भरपूर की उचायीया तो हासिल करने से रहे
भरपूर को अपने अंदर के मर्द की पक्की ईंट का यह-सास भरपूर नहीं है
इसीलिए इधर उधर के भरपूर से डर नहीं लगता
You must be logged in to post a comment.