भरपूर अपनी मदद अंदर की पक्की ईंटो से करवाता है
फिर तो ख़ाली बैठना भी आसान होगा वेहले के लिये
रोज रोज के झंझट को ख़ाली एक रखो
भरपूर अपनी मदद अंदर की पक्की ईंटो से करवाता है
फिर तो ख़ाली बैठना भी आसान होगा वेहले के लिये
रोज रोज के झंझट को ख़ाली एक रखो
वेहली आंखे सास के दामाद को
भरपूर प्यार से पड़ती है
इसीलिए भरपूर प्यार की आखे
वेहले को ही स-वारती है
तूतू में में की दुनिया पूरी जेल
एक चोर एक सिपाही का भरपूर खेल
भरपूर आधा इधर उधर पूरा मेल
एक बाहर भागे एक अंदर रेल
अंदर का बच्चा वारा फेल
अब भागो आई सारी बूंदियो की
मईया का gut _op ख़ाली a-वेळ
निराली छाया बांधे ख़ाली gut गोदी ऐल
y _ol_ow l-y _u_te_n
_en y nit has _ull freed()m
to sn@ch full_ess p_een
in()id a wor_d of y o_n to
un()on u gut surface()all
on wor_d _een
असुरो की बीमा(या)रियो का
तो हुया सत्युग
तो सारा बीमाहीन युक्त है न
is th-is an enjo- -able mo_ent
to clean-mop-clear
gut godi’ ground
bec()me s()able
_t-@ _ent
पिछले द्वापर युग में कृष्णा का
जन्म जेल में हुआ ता
अदि-नाग की छाया ने मईया की
गोदी अंदर पहुँचःया च
इसी लिए अंदर का ख़ाली बच्चा ही
gut गोदी का सारा अर()माया मा
गोदी के पानी में कच्ची मूर्ति विसर्जित
करने से पक्के अपनी अदर की मर-तियो
की गलती गयी गाती गा गानी गे
सास के दामाद की पढ़ाई बहुत हो
गयी gut गोदी तो पहले से हे डूबी पड़ी है
(पिछले, आज और आगे को मिला के
कलयुगा 2 कलयुगा
भरपूर ने तो इक ही काम भरना है)
दामाद तो हमेशा ही क्यों की निराशा
की आशा को ही पूरा पांडेगा
_ing _app-y
no mat_er wh@
y in()id u s_a_te y
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be u y to b-u-y in()id
full_ess _ry
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