असुरो और बूंदियो के बीच में मंथन
सृष्टि गोदी का अमृत पूर्ण समर्पण
काल रात्रि है मधानी का सारा दर्पण
और आधे बैठा है निचे ध्यानी
नीलपंथ अभी हुआ अंदर का ज्ञानी
कब ख़तम हो कलयुगा की भरपूर निशानी
असुरो और बूंदियो के बीच में मंथन
सृष्टि गोदी का अमृत पूर्ण समर्पण
काल रात्रि है मधानी का सारा दर्पण
और आधे बैठा है निचे ध्यानी
नीलपंथ अभी हुआ अंदर का ज्ञानी
कब ख़तम हो कलयुगा की भरपूर निशानी
जिसको सृष्टि गोदी की ख़ाली चुपी का एहसास नहीं
उसे अपने अंदर की शांति के परिश्रम का ख़ाली विश्वास नहीं
a babi breath is qute
though wiw o babi is sound of aum()tea mute
be carried all along in(out)id ro_t
paus y e-mail & y ()s-m-s
for y in()id u did 1 _ol _ood
& to()tal wiw o 10 _ad
&
for a_on u _av in()id pass nothing _rite
& 4 t_en now
adhe is totallee emptee ()esting
wit()in lap of gut nature’
aum()tea wiw o _en-ses
no()thing initiated
असली ल(प)ढ़ाई तो अब होगी
आधे सांप और भरपूर निवाले की
भरपूर शरीरो तो गिरा पड़ा है
अदर की बीमा(या)रियो के मर-दो
की लाठी से
लेकिन भरपूर ज़ुबान की जवानी
तो कायम रहेगी
ख़ाली माँ को ललकारो भरपूर भरो
तथा(अ) स्तु
आधे आम
हांजी
for emp()tee _od will alive
in()id
gut nature godi th()ive
un()on gut nature godi’ to()tal 6
ne_er s_ow y() _ace
a _lades of _rass
re_oice
a _ew d()opping in()id ma__
सृष्टि का ख़ाली gut परिवार आ रहा है
gut गोदी में समाने रो-शनि(ख़ाली)वार
भरपूर जगह नहीं है अंदर ख़ाली इ()वार
तो खडी कब-रो के अंदर ही समायेगा
आधे की ख़ाली मचान का उप-चार
a_m()tea tree
no()thing _eave
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