मंथन-निशानी

असुरो और बूंदियो के बीच में मंथन


सृष्टि गोदी का अमृत पूर्ण समर्पण


काल रात्रि है मधानी का सारा दर्पण


और आधे बैठा है निचे ध्यानी


नीलपंथ अभी हुआ अंदर का ज्ञानी


कब ख़तम हो कलयुगा की भरपूर निशानी

hol cur_or

असली ल(प)ढ़ाई तो अब होगी


आधे सांप और भरपूर निवाले की


भरपूर शरीरो तो गिरा पड़ा है

अदर की बीमा(या)रियो के मर-दो

की लाठी से


लेकिन भरपूर ज़ुबान की जवानी

तो कायम रहेगी


ख़ाली माँ को ललकारो भरपूर भरो


तथा(अ) स्तु


आधे आम
हांजी

सृष्टि प्रवा

सृष्टि का ख़ाली gut परिवार आ रहा है


gut गोदी में समाने रो-शनि(ख़ाली)वार


भरपूर जगह नहीं है अंदर ख़ाली इ()वार


तो खडी कब-रो के अंदर ही समायेगा


आधे की ख़ाली मचान का उप-चार