y भरपूर is _na()ching adhe em()tee bit
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this _ill _ave भरपूर con_e()quenc()es
for y _ill भरपूर wor_d in()id _ite
a-lon u be @_ar of wiw o
to()tal mother nature’
gut()ite
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0-1-0-ness within lap of
to()tal mother nature’s womb(gut)
i am emptee in(out)id
eie aum f_owing no()thing
एक सास से दो बच्चे नही संभलते
आधे अंदर ख़ाली फुरसत से जलते
आधा बाहर निकल पूरा मचलते
शोर गोदी में किसका आधा ढलते
मर्दो के चोचले पूरे नही चलते
खेले आंख मिचोली आधे-आधा
शाम के रंग न आधा घर मिलते
आधे ख़ाली अंदर फूल ख़ाली फलते
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बूंदियो की साँस का सारा महत्व होता है
ख़ाली 0 तत्व
एह लो बन गया कल का आज
भरपूर घर से बाहर निकालता है ज़ुबान को सास के दामाद की मौजूदगी के लिये
ज़ुबान भी इधर उधर देखे सहायता की दहन को लिये
दामाद के अंदर की भरपूर लीला को मिले भरपूर विरोध के गिले
अब सास क्या करे भरपूर दामाद की ज़ुबान जा जोड़े ज़िले
आधा भरपूर दामाद चखे-रखे और आधे मोड़े या ड़क्के
gut गोदी को अन-सुना करके देखना एह है की असुरो को कितना
ख़ाली भरना पड़ेगा बिना अन्य-दाज़ चखे
जिस युग में भगवान भी देख के ख़ाली रोआ है
_oor _ast 10s आखे अखे
अब भरपूर काअस्तित्व नही है ख़ाली अस्थि भी भरपूर देखे
तो भगवन का सहयोग भी नही होगा ख़ाली मौजूदगी का विरोध
इसी लिये भगवन भी गोदी के बाहर ढूंढे gut ब्रह्माण्ड की मौजूदगी का वियोग
कब तक बि(ल)खेगा gut ब्रह्माण्ड की चाल का ग्रहयोग
(पता है आधे को सोने नही दिया रा ने ख़ाली रात दर)
कल को आज
कल को आज
कल को आज
बस कर आधे
हाँजी बूँदा मईया
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a _ib()r@ed gut is to()tal wit()in chi_d
b()eathe em_tee no()thing for to()tal mother nature
&
un()not b()eech o_n gut’ t()in _ine
10-10
01-01
बाहे ख़ाली फैलाने से ख़ाली धड़ अपने आप उठता है
(हवा को ख़ाली चूमने को)
gut मईया की बूंदियो को ख़ाली गले में उतारने के लिये
जैसी gut मईया झुक के देखती है गोदी में बूंदियो को
बूंदिया भी रुक रुक के झुकती है गोदी की आँखों में gut मईया को
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गोदी के किराये-दर
आलीशान भरपूर घरो में जगह नही है ज़ुबान को बिठाने के लिये
बान को खुली छूट दे राखी है इधर उधर
भरपूर कर रखा है गोदी का ख़ाली दर
निकालो घर से बाहर भरपूर को
पर बाहर भी तो गोदी का अंदर है न
देखता हू कैसे डंग करते है gut मईया की गोदी को
एह तो gut मईया का आधे ही करेगा ख़ाली
आज का युग कहा गया
अब एह कल को कैसे आधे आज बनायेगा
निकालो मत सीधे भरपूर की दम को दबायो की दम दबा के
खुद ही फिसल जाये सिल के अदर
a full_ess re_ters _et ton()ue fli in()id _outh_ul ban()er
गोदी का किराये का घर मेरा होता है तो फिर तेरा कहा है भरपूर मगरूर
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भरपूर नाम बुंदिया बद का इम्तिहान
सांसे टिकने ना दे ज़मीन पर
टिके भारी इंतकाम
न लाये कोई ख़ाली मकान की पहचान
लकीरे है भरपूर लाभ की लम्बी लगाम
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