देवो के ख़ाली देव
नंदी के महा-देव
चन्द्रमाँ का आधा सेव
ख़ाली पर्व की सती के सदैव
ख़ाली अन्तर(म)यानि है
भू के ख़ाली त्रिदेव
देवो के ख़ाली देव
नंदी के महा-देव
चन्द्रमाँ का आधा सेव
ख़ाली पर्व की सती के सदैव
ख़ाली अन्तर(म)यानि है
भू के ख़ाली त्रिदेव
यानि की एह लो
ख़ाली मान लो
ध्यान नहीं है
निकाल दो
आखे गम है
रुमाल लो
सर पे चढ़ा ले
बाल पहले गिरा लो
गोदी के दिन का आधा अंत होता देख सास को भरपूर चैन मिलता है
लेकिन दुनिया मे किसी एक का अंत अदर नही रात रोता
तो लय बाहर भार भरपूर भोता
और
अनंत रात को कभी न छूता
भरपूर सास के अदर का एक-एक का अंत ही
पूर्ण एकांत
सारा गोदी का ख़ाली सिध्दांत
आखे हुई पूरी मृतान्त
सृष्टि गोदी की ख़ाली शांति तो किसी को भी भरपूर सीख नही देती
फिर भरपूर सास को तो जरूरत भी नही है किसी भी आधा जन्म मे
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ना लताओं गोदी का दिन एक होता है
जो ख़ाली बोता है
वशी को भूत से मिलायेगे
भरपूर दूत बनो सब एक मिल आयेगे
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मूषक राज की स्वा()री है महा विद्या की ख़ाली आरी
धीरे धीरे गोदी मे आए ख़ाली गंध की राज दुलारी
गोदी मे सारी खिले अदभुत ध्यानी की ख़ाली क्यारी
दिखे जहा जहा वहाँ है सृष्टि मईया की गोदी प्यारी
जब सूर्य का आधा कण गोदी के अंदर आ जाए
तो क्या होगा
भरपूर गलेगा और ख़ाली घुलेगा
ख़ाली अनु का गोदी मे मान नही रखा
तो फिर आज भरपूर आन()धान की
सास अदर कैसे गलोगे
जब सास को अंदर मौत आती है तो
बाहर के शरीर को दफना या जला दिया आता है
जब भरपूर सास मर के अंदर ही ख़ाली जाग जाती है
उसके अंदर के भरपूर धढ़ अपने आप ही पूरे धढो को दफना देते है
या फिर ख़ाली अग्नि मे जल आते है
क्या हुआ
तुम-हरी सास मर-मार-मर के भी भरपूर भारी बीमा()री
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