अनंत रात

गोदी के दिन का आधा अंत होता देख सास को भरपूर चैन मिलता है


लेकिन दुनिया मे किसी एक का अंत अदर नही रात रोता


तो लय बाहर भार भरपूर भोता


और
अनंत रात को कभी न छूता

सारा -शक ख़ाली

मूषक राज की स्वा()री है महा विद्या की ख़ाली आरी


धीरे धीरे गोदी मे आए ख़ाली गंध की राज दुलारी


गोदी मे सारी खिले अदभुत ध्यानी की ख़ाली क्यारी


दिखे जहा जहा वहाँ है सृष्टि मईया की गोदी प्यारी

आधा अंश का कण

जब सूर्य का आधा कण गोदी के अंदर आ जाए
तो क्या होगा


भरपूर गलेगा और ख़ाली घुलेगा


ख़ाली अनु का गोदी मे मान नही रखा

तो फिर आज भरपूर आन()धान की

सास अदर कैसे गलोगे

अदर उठे के बाहर लुटे


जब सास को अंदर मौत आती है तो

बाहर के शरीर को दफना या जला दिया आता है


जब भरपूर सास मर के अंदर ही ख़ाली जाग जाती है

उसके अंदर के भरपूर धढ़ अपने आप ही पूरे धढो को दफना देते है

या फिर ख़ाली अग्नि मे जल आते है

क्या हुआ

तुम-हरी सास मर-मार-मर के भी भरपूर भारी बीमा()री