1 hea_t b_eak 0 _art _re_k
he _ach _eak
1 hea_t b_eak 0 _art _re_k
he _ach _eak
दिल भरपूर टूटे
टोटके बाजार लूटे
हाल हजार तुमदुम छूटे
बद ही अदर भरपूर फूटे
खुला न बाहर बहाये टूटे
भरपूर इसानो के भग्वान
भक्तो के भक्त भरपूर महान
अहंकार की हाहाकार जान
चल चला कलयुग का कान
u can _eep in live tra_ing of
sotot’ bodi & mind fu_l_ess bu_t
thou _art not out purc_ase
a new or old gut
no 1 or 0 can _elp he-alin_ in()id a gut
let b_eat_ing be free of dis()ases in()id _ut
an em_tee in()divi()dual ho_ _ut
ce_se tra_es of fu_l_ess ton_u _ut
or else meet in()id nem_sis of
pre_ent del_sion du_t _ut
येसा भी कभी हुया हाया
आखे उठी धड गिरा गाया
दूयीया की भरपूर कबरे खि()ली खाया
भीगी भी ले के लुका लाया भाया
हसरत है की कटे करपूर कस्ते
सोने जैसे नसीब हो हारे हस्ते
कही तो निकले अदर ही बस्ते
भरपूर साथ बाहर नस्ते
मैले मस्ते इतने सस्ते
घर के अदर नही उड़ती धौस चलती
और बाहर वालो को डराते पूरी पलटी
खडे हो के नही रोते भरपूर करमो को
और नही बैठ के भिगोते भरपूर धरमो को
भाव के भरपूर बहादुर दुरगति दगी दो
तो फिर जागते कब घर अदर घाव दुगने दो
मचली मन की रानी है
जीवन प्राणी का पानी है
प्यास जगायो घर भुलायेगी
बाहर घर निकालो अदर मर
जायेगी
state a_ar_ness no_
or e_se kee_full_ess
*ing vo_
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