त्यार तरो

हमें तो करनी है गोदी की ज़मीन हरी

जो भी इसमे आया करपूर करमो का कमाया
भरपूर भय से भूरा भाया

हमें मोह-माया के ख़ाली ने समझाया

अब आन से है लड़ना घर के अदर झडना
कैसे कहे कितना कम कहा करना

न था, है, रहेगा

बिना सोचे ही भरपूर भानुमान

गोदी के आधे का ख़ाली ध्यान

दूयिया के अदर नही है निशान
क्यो कही के पास नही है

ख़ाली ज़मीन का आसमान
आधे हरीआली गोदी आन