घडघूर घर के अदर समाज की
सासो के वास वा वू(वू)ध पीके
एक मरद तरो तजा
तो पडपूर पानी क्या
वारेगा वमाज
यह अभी तक रद
क्यो कही कुया
Author: mandalalit
म(हा-पा)प
सास के अनुभव की गहरायी मापने का स्वा()लाल तो भरपूर ही बहता
साँसो की ख़ाली गहराई नहीं मापते
गोदी की ख़ाली खाई से करपूर कांपते
कल-युग कागी काली
आधा जन्म का एक मरी हुयी मौत को लेके जाता
तो क्या जगी हुई मौत को लेके आएँगे
आधा जन्म के दो-बारा अंदर
बुलायो बाम
आधे ख़ाली आधा घर के भरपूर असुर
आधे स्माधि में रुकावटे डाल रहे है
कहा है आधा आम
गोदी के वानरों के ऐनके इक्कठी
की हुई काठी पे आ रहे है
आज तो नहीं पहुँच पाएंगे
त्रेता का आज कलयुग के
कल में कैसे पहुँचेगा
before lore
roo_ sound
__ll-able sur_ound
wor_ go roun_
& utter-uns boun_
that’ @
y-0-s in()id u hal_po_nt ha_ _eached
ho_ fu_l_ess 1sel_ in()depend_nc in()id 1 _ae
0_ing wort_ wor(fr)ying a-bout in th@
रा(कहा)ब्ता
यह क्या होता है
हरा-आम-खोर
यही न
आ-राम को भरपूर हरा न मिले
यह दुयिया की तूतू मै मै के समाज मे
सब कल्मुहि, जन्म-जली क्यो कोटा
आधा जन्म-जला कल-मूहा
कल को दबा के दबता
लाप लडाता
तुम-हारा कहा खडा है
भरपूर एक दुसरे एक को कहता
दफा हो जा
तो दुयिया के समाज
की तूतू मै मै मे ही रहता
गोदी का आधे तो एही कहता
वारो वफा वरो वारता
अनु()यो की मति
सब को यही सन्मति देता भगवन
सारा दिन तेरा मेरा
रात कहा रह गयी
यहा मेरी अनु-मति के बगैर कोई आ नही सकता
इसका बल मत
कंस का भरपूर घर अदर-बाहर आने की
आज़ादी ख़ाली कस को नही दे सकता
फिर यह मेरी(मेरा) किसकी मति से
दुयिया के समाज की तूतू मै मै मे खडा
no 1
मौत के मूह मे जो गया अदर वोह बाहर कहा निकला
तो लड़ते रहो दुयिया के समाज की तूतू मै मै
के भगोड़ो भरपूर भाया पिटला
दुयिया के समाज की तूतू मै मै का मूह कहा होता है
जन्म/मरन का मुँह gut ब्रह्माण्ड की ख़ाली सृष्टि की गोदी
किसका क्या नाता छूटा किसका भरपूर भूट्टा
आखे खुली आखे बद एक फिसला फूटा
ख़ाली खाता
आधे की ()रजी का ख़ाली नाता
इतना तग तो कोई मौत के मुँह में भी नहीं करता
घरो के अदर जितना तूतू मै मै की दुयिया की
समाज सा सर(ना)ता
ले आयो भरपूर छाता
तूतू मै मै से जीतने-हारने का गोल
दुयिया के समाज का अदर सनमोल
सन-घरश अदर करे इसबगोल
सब सरा साया भूतकाल भूगोल

You must be logged in to post a comment.