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रजस vs तमस
cre_ation 0 ali_n de-s()uc_ion
@ सत्व lo_s in()s_ruction
u _ar hel_less
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less_ess
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रजस vs तमस
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@ सत्व lo_s in()s_ruction
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एक घर मे दो नर नही रह सकते
तो जुबान मे कितने एक-एक
जरा जरा जाम जमाने जड
एक एक नही
गाठे गाये ग्वा गेक
नरकासुर का सुर का नर कम कहा
यह यैसा युया
देसी घी की शुद्धता की गहराई गति
ख़ाली उँगलियाँ ख़ाली मति
a _ime is ru_ning
काल दौड़ा दया दिखा रहा
तुम्हारे पास आखे खोलने
खमय खा
u _an kee_ ri_ing ever-y1-t-ing wit_out
in()id nothing ex/ience com_s to
w_en _iting u _ill for_et
rit & rit
bit_ing
शनि का है प्रकोप पोश
मंगल में गोदी ख़ाली ख़ोश
किसका भरे भरपूर बेहोश
दग्गियो दे दिलाया दोश
तुम साथ मे ख-डे होना तो क्या
दूर से भी आखे उठायोगे
तो गोदी की ज़मीन जेगी
शुन्य vo_t के झटके झट(से-गई)गी
म्यू महसूस महि मुया मटकी
पेरो की पडपूर पमीन पिसक पयी
आया आधा जन्म जाती
सब कुछ कितना नया नया नगा नाती
आधे का राहु-केतु भी ख़ाली खो देता
ख़ाली कब्र भी इधर उधर रो रेता
बुँदियाँ रखवाली अंदर बाहर नाचे नचिकेता
ज़रा सी ख़ाली समझदारी दे गोदी देती सब सुला
रही बात घर बदलने की तो
गोदी में घर एक दिन में नहीं बदलते
कितने भरपूर आधा जन्म भटकते
तूफानी रात मे भी न अदर रोते
दिन्दा दिली से रूह को दगते
समा(दा)ज आज नही बदले बाते
हमें तो कुछ-कुछ समझ सारा
यह शाति बायी क्यो उकसा रहा
हमें ही घर से बाहर निकलवा अहा
इस के तो काल के अदर कूडा काला
बहुत कुछ मिल—-भगत सगता साला
घर है दगना उछाल जल्दी वाला जाला
इसने सब है घर के अदर पता लिया
हम क्या करते है हर रोज पिया
देखे ध्यान से धार न धरे दिया
क्या उपाये है अंदर जिया
घर का मालिक ही न सुने
अनसुने आधे ध्यान धिया
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