दाज दाते दो

ख़ाली दिल को ढाल बना के दरवाजे ()तक लाते हो
और दामाद के अदर फिसला के भूल भाते भो
और फिर अदर तूतू मै मै मर-जाम जमा जय
सिसकिया सरकाते सौ

वाह वाह व-माज वोट वारो वो

महीं मानते

तुम बिना जाने घर के अदर

आधे के साथ रह-गुजर सकते हो

तो जान के भी क्या करोगे

घर के अदर गोदी नहीं होती

और यह गोदी मे बिना जाने
कूडे का ढेर किसने
रगा रखा र

शाति शनि शाह सुनो

देखो दात देह दाह

इसकी जुबान की मा है अग-अग-करे-जी
इसके पास नही है समय सार सरे सर-जी

हमारी मईया की गोदी मे हमें नहीं
kit()नुयो की कही बु(बू)लदी चा(क)हिये

नही सुनना तो तीन दिन
(चोर-चाद) बाद बनाना

यह शनि देव की शाति
के लिये लाडे लडते

म-गल-मय मडते