दुनिया मे अनगिन्नत मा-ताये
और अदर भाई भाप न सोने
के डडे डाल डही डचले डोने
तेरा भायी()न र तुझे अदर तितना तडाता ता
ती तू बाहर अच्छा/बुरा भरपूर भिडाता भ
दुनिया मे अनगिन्नत मा-ताये
और अदर भाई भाप न सोने
के डडे डाल डही डचले डोने
तेरा भायी()न र तुझे अदर तितना तडाता ता
ती तू बाहर अच्छा/बुरा भरपूर भिडाता भ
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t_ough 0 _raft des(i-re)tin_
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is co_ing as_ it is in()id u
coo_ed cu_ses
y-0-s nu_ses
sas _ull pu_ses
ca()ma re()bu_ses
गोदी का to()tal आश्रम
सांसो का सारा परिश्रम
जिसके पास पा पही प()म
वोह है दुनिया अदर एक भ्रम
मै (म)चली तू (तेरी)तली
इधर उधर सर सोचा नि(वि)चली
अदर बहार उ(छेड़)छली
दुनिया मे रहना है तो पत्थर का प()म
f_ame बो बनना बी बड़ा
बाहर गाड़ेगे अदर उखाड़ेगे
लोटे के लाट घर इधर उधर लुटाये
लोट ले लाये लाटू अदर लिहारे लुटे
अदर जगाये बाहर भुजाये भुटटे
_ime _ach chan_es in()er y li_e
a un-i-वर_ _ill pro_id _all
an_ers to y-0-s in()id u
_ar th_y re_ill
0 mut()u-all-y ass_ring
_@_er t_an _il_ly _up-por_ing
y li_e 0 _ip sho_y s_oring
शरीर का शडपूर शो(चाल)तल
y-0-s in()id u का मो(रा)तल
इधर-उधर का हो(बे-हाल)तल
अदर एक एक रो(चक)तल
दुनिया के सडपूर स-सुराल मे
गोदी का माएका अंदर ख़ाली
आधा रहे जरपूर जाड़ा जय जोड़े जाली
आधे नी णमाधि न नोड़े निगोड़े नाली
ख़ाली मईआ दिन-रात ज़मीन आसमान ख़ाली रखती
ताकि ख़ाली बच्चे स्माधि में सुरो संग ख़ाली खो खारती
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