क्युकी 2 काल्कि
आधे है काल की सारी ख़ाली छईया
तुम आके अपनी मे ढूढो भरपूर बईया
mir(or-a)cle की चाहिए दईयां
गोदी का गमल तो ख़ाली कीचड में ही खिलता
गांठ गड़े गढ़ों गा गईयां
क्युकी 2 काल्कि
आधे है काल की सारी ख़ाली छईया
तुम आके अपनी मे ढूढो भरपूर बईया
mir(or-a)cle की चाहिए दईयां
गोदी का गमल तो ख़ाली कीचड में ही खिलता
गांठ गड़े गढ़ों गा गईयां
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सास के भरपूर दामाद का भगवन ऊपर ही कही रहता है
अदर तो जगह है भरपूर के लिये
जब सास के भरपूर दामाद की मे अदर ही पूरी -यान मे नही ही
तो बाहर की तू पूरे यान मे ही यायेगी तो
दामाद याद यहा yea()ning yoo_
कहते है ऊपर वाले की मर-जी के बगैर पत्ता पही पलता
(मर-जी ऊपर भरपूर होती है अंदर तक आते आते
ख़ाली हो जाती है स्ट्रेटोस्फियर में पलायन की आग से)
ऊपर वाले के पास पल नहीं होता या अंदर वाले के साथ _@chi मारता
पत्ते तो गोदी में पवन पुत्र की मर्जी से उड़ते उ
इसका बल मत यह है की सास के अदर का एक-एक पटा पूरा पल्टा
हाजमोला से मोला नहीं आधे का खड़पुर खड़ा खडगोला गोल खारा खोला
y-0 _if _ik _round_og da_
_et ri_ _it in()id u _ol _og ha_
गू-गल f1 app-पल
0 con_ain-er gra-पल
to-y_ta in()id u _tra-पल
du_l v i’m _olling _it a-er-टल
सृष्टि मईया की गोदी में हमारे सोने की नईया
नदी तैरती ताए घर का ख़ाली खिवईया
नौका सांसो की भीतर ख़ाली सहज सिवईयां
अंतर्लीन अंदर आँखे विभोर ख़ाली अईया
तूतू और मे मे साथ-साथ मिला(ा)प
क्या होगा एक-एक भरपूर फिर विला-प
बजेगी बाठी बायेगा भरपूर भाप
बिकलेगा बाहर सास की रमड़ी राप
—————————————
सपने मे सास अदर जाग जही जाती जा
और बाहर बो ब्या-ही बोती बा
सपने बनते और बिगड़ते भरपूर
सास भी सगल सारती सर पूर
जाच जा जाने जागन जे()ड़ा टूटा टार टूर
s_& cle_ar
in_ar_ _oor op()n
y-0-s in()id u mop()n
जो बैठे थे उनको खडा खाड़ दिया
बिना खाड़े अंदर नहीं घुलता
ख़ाली दरवाजे की भरपूर ताली तो एक साथ से सी सजती
भड़ाम आम
भरपूर भेदभानी भरपूर भाया भय भवानी
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