ख़ाली काल्कि के विचार है कहा दर्ज गोदी के ख़ाली धर्म उपचार फर्ज
आधे पुराण (हरि)आळी आर आधा प्राण पूरे पार
ख़ाली काल्कि के विचार है कहा दर्ज गोदी के ख़ाली धर्म उपचार फर्ज
आधे पुराण (हरि)आळी आर आधा प्राण पूरे पार
गोदी के पा(दा)ना का कि(हि)साब तुम-हारी दुनिया दिखाती दया
है ही क्या गोदी के अंदर तुम-हारी दुनिया की दी-वानी
सास के भरपूर दामाद की भरपूर एक-एक निशानी
गोदी की उछाले भरपूर फैलाये अपने अदर परेशानी
जेब के अदर भरपूर बीमा(या)रिया दुनिया के एक-एक को भरपूर प्यारिया
किसी को नही है ख़ाली तुमसे उम्मीद बाहरिया की नीद मे भरपूर भुम भाचो भिखारिया
भरपूर को भरपूर से मिलने के बाद वक़्त भरपूर जाया बर-बाश्त बाही बोटा
रिश्ते दुनिया को अपनी बाहर की मर()जी से क्या मोड़ते
भरपूर भोड़ना भी भुना भाना भोड़ते
भगवन का भरपूर आ-शीश-वाद है
सास के ददमाद अदर सबको एक-एक भरपूर याद है
कि नही तुम-हारी मर-जी
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अब आधे
आज की सास सो स्या ()हेगा
सास के चनदर चो चाथ ची चलती चा
पर हाँ g(ut)round तो गोदी की जिम्मेजारी जा
बीमा(या)रिया जो जारी जाम जनता -ती-जाती जा
पलायन अदर भरना सीख सो सती सटटा सा
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सास भरपूर तूतू मे मे भेहमी
मेरा अदर अध()मी है साफ़ आधा
तो मे छीनू एक-एक का भरपूर
दुनिया(तू)दाता बाधा
फिरगी तो है भरपूर बगी
इधर ऊपर से भरपूर इधर कघी
निचे से नचाले ऊपर भरपूर जगी
सास दुनिया दी अदर-बाहर भरपूर डगी
ne_er _ind _ever _ind भरपूर b_ind
for u _eep urn-ing godi’ em()tee _ind
जिसकी लाठी उसका भरपूर _ance
फूटा मरद भरपूर फास फटा _ance
देखा दवारा दोला दरपूर _ance
अदर भरपूर एक-एक आल _ance
सास के दामाद की भरपूर इच्छा(ईर्षा)शक्ति है gut _ur_ace()all
की दुनिया के अदर एक-एक की भरपूर भक्ति
और अपने अदर भरपूर छाया का बद-आम तीस मर खा बत-तीस बाटी बत्ती
बच-पन की मे साथ सास साया
दूर से डरा तो भरपूर पदर पाया
तुम-हे घर के अदर किसी ने सृष्टि गोदी की इज़्ज़त करनी कही का कहाई
इसी लिये जहा चाह भरपूर मे बरो-बद आधा आयी
अदर बाहर इधर उधर तूतू मे मे भरपूर भाड़ भ-ड़ाई
आखे भी ढूढे भरपूर पहियो पी अदर एक दुनिया (पर)चार-पायी
दगियो मे कब्र की भरपूर कमी से पैर अदर
पसारने पर सर दीवार दरते जिन-जिन दा
खाक मुर्दा जिया -खाड़ते झाडते
दिलो का भरपूर नाम जिन्दा है ज़िन्दगी का फंदा
भरपूर होश वालो को भरपूर खबर खय
आज का एक-एक अदर ही छिपा भरपूर ()भय
on t_ing un_non
भरपूर दर-द का डर
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