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Author: mandalalit
ऐसा धन
ढे-से मिट्टी मा मन
ऐसे आधे आ अंदर अन्न
बने है तो बाली बुरा बन
नहीं न नूर नदिया नन
आ आँखे
ब्रह्माण्ड बारी बाली बांखे
गोदी(कोख) की ज़मीन की राखे
दिन रात करे ख़ाली खाखे
अंदर ()तरे निरा(आ)ली आँखे
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_h@ u _ae is _out f_ar
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पा-खे
भरपूर आखे कैसे देखे गाठो गी गाखे
नर नजर नही घुलती घाट एक घर चाखे
कौन मिलावे अदर बाहर के पह-पाखे
खाव खडा खूपर खहे खारा खिचे खाखे
न कोई अमीर न की गरीब
दुनिया का एक एक असुर घर घर का ()कीर
अं() ज्ञानी
रा के केस ढूंढें मत-मल मि()नी
देख तो जरा आंख अंदर ज्ञानी
कट कट काल कारा कमानी
शब्द शांति शत शय्या शानि
बरे बहावे धरोहर धार ध्यानी
खो खो
कल यिस ()यार की ()याति-र घर के अदर के ()लरो को लड़ा लिया
आज सास की बी()यारियो की काट कडपूर कुचले
ख़ाली खु()लो खी खु()दियाँ
मलो मल म()दर मु()क्की
कलयुग के ()रो की तरपूर तरक्की
ता ताके न नाते
द्वापर दे दवारो दे ख़ाली आधा-आधे की ()क्की
an age of pi_ces2aqu_r_us
hous vs hom
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