पा-खे

भरपूर आखे कैसे देखे गाठो गी गाखे
नर नजर नही घुलती घाट एक घर चाखे
कौन मिलावे अदर बाहर के पह-पाखे
खाव खडा खूपर खहे खारा खिचे खाखे

न कोई अमीर न की गरीब
दुनिया का एक एक असुर घर घर का ()कीर

Published by

Unknown's avatar

mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

Leave a comment