मै हू

मूरखो के मारदार को खो मूरे मियानी मा
बिना मूह खोले ज़ुबान जही जाती जा


सठियाये के भरपूर साठ सा
जूठे जी भरपूर जाठ जा
सास सरपूर भरपूर ठाठ ठा
नही अदर आये भरपूर चाठ चा


ग्वाची होइ सास कितनी ख़ुशी से तूतू मे मे को काट कही का
बाया भाडा भिखारी भरो एक भरपूर करजे-कारी


अदर सास को मार मिटा के ही बाहर की चिता धरोगे
(अदर की चिता तो सास को गुमा गाती गा)
येसा मुमकिन तूतू मे मे की दुनिया मै है

जो पा()या अदर दि ग्वाया

जिस भरपूर जानकारी को पाकर तुमने हमें भूला दिया
ओह तो है सास के दामाद के एक-ज़ुबान की जान की भरपूर कारी
क्या टोड़ायेगी अदर भरपूर मल-भारी
पर तुम यह नहीं भूल सकते अंदर आ त्यारी
हमें सोना है हमें खाना है हमें गोदी में खेलना है
गोदी में है हम-आरी

हम तुम-हारे आज के आ(औ)भारी अहि आ
उचित गोदी जो अंदर ठीक समझे वही है संत()लन की ख़ाली ख़याली

0 point a-no_nted

y सास का भरपूर दामाद is s_o ag_itated

in(out)id th@ d()opping _ol an_er

wit()in _ap of nature d()ight


for u _ar un()able to con_rol

y-0-s in(out)id b_ing _ail-y _out-een _ut ill

hea_t_ ins_a_lling _ur_ace()all बीमायारिया _ill _est


जिसने तूतू मे मे की दुनिया मे खेला सासो की भरपूर सत्ता सा सेल

अदर ही पाये भरपूर फैलो का एक भरपूर भाप-मेल

जो बुझाये इधर उधर sh()_aw का ख़ाली _ail

-चारी

घर के अदर की ख़ाली ला(वा)चारी


है दुनिया की इधर भरपूर उधार खु()मारी

मिलाये फिर-आये अदर एक एक प्यारी

गिले तो हठो लाठी भरपूर जिले-लारी त्यारी

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0 _ad/g_d in()id भरपूर u s_an()दर्द st_d

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भरपूर g_ass _utting inid u भरपूर p_o_r_ess

d-n-d

साल के युग भरपूर त्रिकाल

अदर न सिकुड़े सार-पूर स्याल

सास के भरपूर बाया बहय बहाल


दौलते अदर बवाल निकले बाहर स्वाल

य मा-या

शर()पूर शक्ति मार-पूर माया
तू अदर बाया कल का एक मे बल-काया
बुरा है अदर दुनिया ख़ाली दया साया
ई()खो दुनिया मे दी भरपूर ख़-माया


बाहर की दुनिया इधर खुली सड़क भरपूर उधार भड़क
और सास के दामाद अदर एक-एक अकड़ आजा पकड़ भरपूर बाहर जकड़