तुम-हारो के an_er में डब-ल()लू() लोटा ला
न जी एक तो एकलौता लोटता ला
पूरी _am-il-y तो इधर-उधर का उधार गोता गाने गायी गा
pm को भी पार पही पती
तुम-हारो के an_er में डब-ल()लू() लोटा ला
न जी एक तो एकलौता लोटता ला
पूरी _am-il-y तो इधर-उधर का उधार गोता गाने गायी गा
pm को भी पार पही पती
मूरखो के मारदार को खो मूरे मियानी मा
बिना मूह खोले ज़ुबान जही जाती जा
सठियाये के भरपूर साठ सा
जूठे जी भरपूर जाठ जा
सास सरपूर भरपूर ठाठ ठा
नही अदर आये भरपूर चाठ चा
ग्वाची होइ सास कितनी ख़ुशी से तूतू मे मे को काट कही का
बाया भाडा भिखारी भरो एक भरपूर करजे-कारी
अदर सास को मार मिटा के ही बाहर की चिता धरोगे
(अदर की चिता तो सास को गुमा गाती गा)
येसा मुमकिन तूतू मे मे की दुनिया मै है
तेरी मेरी जोड़ी या _aim _air
मिलाये मे अदर भरपूर तूतू _ear
कम्बखत कब वखत दर्द भरपूर _ear
कम-जोरि भूखी मार चोर भरपूर _ear
जिस भरपूर जानकारी को पाकर तुमने हमें भूला दिया
ओह तो है सास के दामाद के एक-ज़ुबान की जान की भरपूर कारी
क्या टोड़ायेगी अदर भरपूर मल-भारी
पर तुम यह नहीं भूल सकते अंदर आ त्यारी
हमें सोना है हमें खाना है हमें गोदी में खेलना है
गोदी में है हम-आरी
हम तुम-हारे आज के आ(औ)भारी अहि आ
उचित गोदी जो अंदर ठीक समझे वही है संत()लन की ख़ाली ख़याली
y सास का भरपूर दामाद is s_o ag_itated
in(out)id th@ d()opping _ol an_er
wit()in _ap of nature d()ight
for u _ar un()able to con_rol
y-0-s in(out)id b_ing _ail-y _out-een _ut ill
hea_t_ ins_a_lling _ur_ace()all बीमायारिया _ill _est
जिसने तूतू मे मे की दुनिया मे खेला सासो की भरपूर सत्ता सा सेल
अदर ही पाये भरपूर फैलो का एक भरपूर भाप-मेल
जो बुझाये इधर उधर sh()_aw का ख़ाली _ail
घर के अदर की ख़ाली ला(वा)चारी
है दुनिया की इधर भरपूर उधार खु()मारी
मिलाये फिर-आये अदर एक एक प्यारी
गिले तो हठो लाठी भरपूर जिले-लारी त्यारी
_et _ell
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0 _ar
y _la_er
0 _ad/g_d in()id भरपूर u s_an()दर्द st_d
u s_ill _av _ime 0 _till _ave u _ime
_h@ a_ead 0 _ead
@ y-0-s in()id u _aced _it_ _ath_ic y
0 th@ this _ill _ot ()as_er
0 alwae @ _aim _ime 0 a_ain
भरपूर g_ass _utting inid u भरपूर p_o_r_ess
साल के युग भरपूर त्रिकाल
अदर न सिकुड़े सार-पूर स्याल
सास के भरपूर बाया बहय बहाल
दौलते अदर बवाल निकले बाहर स्वाल
तुम-हारी उर(या)जा है अदर उचा-लो या बाहर नीचे ब-हालो
सृष्टि गोदी काल जहीं ज़ाया धोने धाता ख़ाली खा(मा)या आधे बाल
शर()पूर शक्ति मार-पूर माया
तू अदर बाया कल का एक मे बल-काया
बुरा है अदर दुनिया ख़ाली दया साया
ई()खो दुनिया मे दी भरपूर ख़-माया
बाहर की दुनिया इधर खुली सड़क भरपूर उधार भड़क
और सास के दामाद अदर एक-एक अकड़ आजा पकड़ भरपूर बाहर जकड़
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