दिया वार या

दुनिया दी दुया दा दिया
जाचे जड़ताले जरूर जेक जिया
न दवा न दया दी ख़ाली निया
अदर ही भडकाये भय भा मिया
भरपूर कब्र का घर व्याम व विया


जरूरत की चार दीवारे
भ्रमशान का शम वारे
जो जाये अंदर ख़ाली ख्यारे
तो नज़र न-य धीतर धर धारे


दिन रात गोदी को सताया
सास की सौत साडा साया
एक बात भरपूर भरमाया
अभी नही आया दिखा-वा दाया

र-सूल

तुम-हारो की भरपूर एक-एक की अदर की दुनिया

तूतू तरह मे मे बटी बुयी बही बा


यह मेरा घर का भरपूर सास का ससूल सा

इसमे तेरा तू बाहर इलाजमी लागू लोटा

तू _ic-अदर बाहर भरपूर c_uk-लोटा लगर

खै-रात की -तां

आधे को सृष्टि गोदी क्या खैर खी खै-रात की बातां में मिली है जो


तूतू मे मे दुनिया के एक-एक भरपूर भाटा के ज्वर जाचेगा और

भरपूर नको को ख़ाली नाट्य नचायेगा

घर के अदर भरपूर मेहनत नहीं माती तो इसमें किसी

एक को एक ही क्या पायेगा

सानु की

y-0-s in()id u vo_can_ is _ancing 0 er_pting

_est un_ing sur_eal

गोदी के ख़ाली दिन रात की ख़ाली सच्चाई को अनजान के भरपूर जान
अन्न को भरपूर ज़ुबानो के नाम जनाते जा
y-0-s in()id u की बनायी हुयी तूतू मे मे की दुनिया का एक सत्य साड़ते सा
इसी लिए सास का दामाद भी बड़ा बे-हता बा


so_ _eal out()id rea_it-y th@ y-0-s in()id u hi_den men_al-it-y


p_ease p_oceed to ne*t un_va_lable c_oun_er


y-0-s in()id u re_eed ever-y1′ un_ble enco-un_er

di_ 0 dic_ p_ot

h@ is y-0-s _on_id-er in()id u en_ing res()olution

to s_end _ess _ime on w-w-b

0 so _ast
_here

0 even out 0 odd in()id _out
y-0-s in()id u 0 ()ven _war th@ _omes out 0 odd y-0-s in()id u _here

a si_ple 0 in_cuded _ol va_ue of y-0-s in()id u p_e-asur

खुली छूट ख़ाली ka_oot भरपूर भूत खूट

0 in a _ae g_d y-0-s in()id u s_ud

0 ever-y1 thou_ht u de_erve 0′ ever-y1 _erv

0 terri_ly ob_ective t_ough y-0-s in()id
u _ill _eep _ol sub_ects ef_ectiv

0 terri_ly ob_ective t_ough y-0-s in()id
u _ill _eep _ol sub_ects ef_ective