अन्न मन्नत मधे

गोदी में अंनगिणत अन्न-गणित ख़ाली आधे

सृष्टि की कल्पना कागे ख़ाली खागे

अनंन्त में लींन आरे-वारे न्यारे नागे


ख़ाली ध्वनि धे धींन धन्धु धा धागे

दा दयाद द्वार


काल्कि आधे बिंदु द्वार दहि दौड़ा दायाँ

आधे बिंदु आमने सारा दिन आज ख़ाली खाया

ख़ाली माँ का रात काला आधा सामने साया

आँखों में खूह खुला खंड खरपूर खमाया

सारथी सा साथ सखाया ख़ाली समाया

खो(सो)ए

रिसकी राद में दिन रात ख़ाली खोए


वही सांसो के ख़ाली आँसू पिरोए

ख़ाली बंधन बांध भीतर भिगोए

साँस भी तैरे सारे असीस सोए

ख़ाली जोत गोदी की बहार बोए

गोदी को-ख

सृष्टि गोदी की कोख में आधे अभी लाते तारनी तीख तहा ता


हाँ गोदी कोख ख़ाली आधे बाहर नहीं निका(ह)लेगी


ख़ाली सीख सही सा आधे जमन जही जोगा

ख़ाली खोज्या ख़याली खोला

यू आल

क्युकी 2 काल्कि

आधे है काल की सारी ख़ाली छईया

तुम आके अपनी मे ढूढो भरपूर बईया

mir(or-a)cle की चाहिए दईयां


गोदी का गमल तो ख़ाली कीचड में ही खिलता

गांठ गड़े गढ़ों गा गईयां

ख़ाली अईया

सृष्टि मईया की गोदी में हमारे सोने की नईया

नदी तैरती ताए घर का ख़ाली खिवईया

नौका सांसो की भीतर ख़ाली सहज सिवईयां

अंतर्लीन अंदर आँखे विभोर ख़ाली अईया