ख़ाली सांसे

सृष्टि गोदी की ख़ाली ज़मीन में

आत्मा(तत्व)शक्ति की जरूरत ख़ाली सांसे

अंदर-बाहर धहलती धारे ख़ाली झांसे

इधर-उधर अटकाए ख़ाली फाँसे

टेक टिकाएं दाएं-बाएं ख़ाली दिलासे

ख़ाली खठ खठ

०५=५०

ख़ाली चठ-बठ

ख़ाली आधा जन्म सृष्टि गोदी के अंदर दिन आधे अंदर रात

ख़ाली साँस n()w to()al आधे अठ अट अट

० नव-शिशु ५ इन्द्रियाँ _ut गोदी ख़ाली खट खट

काल के ख़ाली पुतले काला-काली कुल कठ कट कट

आँगन में बलाएँ बूंदियो की बठ बट बट

रा-री

अब ला गोदी की क्यारी

साँस सरोवर सुरो सु-रा-री

रारी रात पिरोए बिंदी कुँवारी

साथ साथ साये नींदी न्यारी

उजळे आधे ऊ-ला आधा वरो वारी

आधे सफ़ेद सच्चे ()साल

गोदी के काल्कि को है ना इंतज़ार

सृष्टि की कोख का ख़ाली खल कख-वार

तुम-हारे अदर भरपूर त्रिकाल का अंत-कार

ना लौटाए अंदर तरपूर तरो ताली ताल तार

नही आया य-कीन भरपूर भहाली बे-हाल ब-हार