a gut ब्रह्माण्ड’ mother nature has to()tal _ap for wit_in chi_d
to br()ath , _rae, _est
an in()id total _est for out()id em()tee un()doing _est
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सृष्टि गोदी की कोख में आधे अभी लाते तारनी तीख तहा ता
हाँ गोदी कोख ख़ाली आधे बाहर नहीं निका(ह)लेगी
ख़ाली सीख सही सा आधे जमन जही जोगा
ख़ाली खोज्या ख़याली खोला
ख़ाली काल्कि के विचार है कहा दर्ज गोदी के ख़ाली धर्म उपचार फर्ज
आधे पुराण (हरि)आळी आर आधा प्राण पूरे पार
क्युकी 2 काल्कि
आधे है काल की सारी ख़ाली छईया
तुम आके अपनी मे ढूढो भरपूर बईया
mir(or-a)cle की चाहिए दईयां
गोदी का गमल तो ख़ाली कीचड में ही खिलता
गांठ गड़े गढ़ों गा गईयां
सृष्टि मईया की गोदी में हमारे सोने की नईया
नदी तैरती ताए घर का ख़ाली खिवईया
नौका सांसो की भीतर ख़ाली सहज सिवईयां
अंतर्लीन अंदर आँखे विभोर ख़ाली अईया
आधे की पालकी
लय गौ()का लालकी
गोदी के गाल gut ब्रह्माण्ड के बाल
कब कटे कंधार के कु-रख़त काल
योग भरपूर माया ख़ाली खाखन खाल माल
जगराते जब जगे अंदर जागो जय जया जलाल
ख़ाली मुहूर्त हेख खे खलियुग खा दिन दायां
आधे ख़ाली गिन गिन अंदर बाँवरी बायां
रात भरपूर रू-गले दिनरैन ख़ाली दिलाया
आधे ही अड़ा ते अड़ाया ख़ाली खाया
काल्कि का अंदर ख़ाली अवतार
gut मे प्रलय की लय का उप-चार
पुराणों मे न दिखा लिखावट का ख़ाली नार
सांसे ख़ाली अंदर अनंत आर-पर
ख़ाली घर अखंड भीतर आधार
ख़ाली टेक धरो दिव्यां-ज्योति के ह(र)जार
गोदी के अमृत के लिए
असुरो और सुरो के बीच में सुर-आ()गर मंथन
सुरो के हाथ है केतु की पूँछ (नहीं होगी सफ़ेद मूंछ) और असुरो के पास राहु की धड़
(आगे से पकड़ पीछे है जकड)
तभी तो जब-अब देखो
तूतू मे मे दुनिया का एक दिन तू खुद ही
सास की धड़ ख़रीदेगा या खरोंदेगा
अपवित्र असुर
घर के अदर ही सास रौदेगा
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