नारा-आणि के आधे का
आम तो उना उगा
तुम्हारी दुनिया में नहीं स(अ)ति
आती है आ
दोर दाती देती दा
नारा-आणि के आधे का
आम तो उना उगा
तुम्हारी दुनिया में नहीं स(अ)ति
आती है आ
दोर दाती देती दा
u need ()oof of
_ow to breathe d_ili rou()ine
of emptee _oof
for y()s un()not know
_ow to _atch
a boondi’
emptee _oof
सवा(ला)ल यह नहीं की आप को
गोदी की बूंदिया नज़र आती है की नहीं
लात की मज़ाल एह है की
आप की आँखों के अंदर
एक बूंदी ही तमाम करती है
सास का भरपूर यार
hav u b()each()-ed within _et
गोदी में आज भी ओइ रेंगता है
सांसो को ख़ाली सींचता है
ज़ेह-पीली आँखे फेंकता है
अदि का भाग आज भी
सांसो के उपर ख़ाली तैरता है
की तुमने आधे के मुँह से सुना है कभी
an emptee intentions within _outh
&
within lap of nature alon _outh
गोदी में बूंदियो के मुँह होते हे ख़ाली बंद
आप की सास का क्या नाम है
gut गोदी के अंदर
रोगी (रोग को लेकर रोता ही रहता है)
भोगी (भरे भोग के टीके रोज लगाता है)
योगी (दिन रात योग सताता है)
an emptee breath lie
_tr8 o_n f@ emptee _round
गोदी तो आधे ही होगी
आधा तो है रोगो का भोगी
योगी को क्या पता कब दस्तक रोगी
गोदी तो आधे की ही होगी
gut गोदी का लावा
रूह का पहनावा
धार अंदर इतरावा
बूंदिया बुने मावा
मोक्ष किसी भी जनम में नहीं मिलता
उसे आज के अंदर ख़ाली तपना
होता है
मूर्ख
o
मा के सुर
सास को तो तूतू मैं मैं
की ही पड़ी है
आधे को भी अंदर जाने की
जल्दी ख़ाली के संग लड़ी है
अभी संभलो
पूछने की मरजी बड़ी है
घरोंदा ना रोंदो
प्यास बुझती नहीं
पास किले के कला कठिन कड़ी है
hope survives in y() world
for ()here is emptee such thing within lap of gut nature
ओहो
एह त्रेता युग नहीं है
आमा नहीं आएंगे
केवल्य-आधे का ख़ाली आधा
(ਚੁੱਪ ਕਰਕੇ ਬੀਜ, ਤੈਨੂੰ ਕਿ ਲੈਣਾ, ਇਹ ਕਸਲਯੁਗ ਕਹਿਨਾ ਬੰਦ ਦਰਵਾਜਾ)
You must be logged in to post a comment.