भरपूर से अपना भार ढो नहीं होता
और गोदी की चिंटी को दाना उठाते
देख कर प्रेरणा मिलती है
एह कौन बातयेगा चींटी की टांगे
gut गोदी का ख़ाली घर-भार उठा
के संभलके के चलती है
भरपूर को तो यह भी नहीं पास्ता
यह क्यो अदर क्या है, ढोने से पहले
इकठा करना जरूरी है
भरपूर से अपना भार ढो नहीं होता
और गोदी की चिंटी को दाना उठाते
देख कर प्रेरणा मिलती है
एह कौन बातयेगा चींटी की टांगे
gut गोदी का ख़ाली घर-भार उठा
के संभलके के चलती है
भरपूर को तो यह भी नहीं पास्ता
यह क्यो अदर क्या है, ढोने से पहले
इकठा करना जरूरी है
a week la()er is s()ill week
ਅਲੀਆਂ ਪਤਲੀਆਂ
ਕੇਹੜਾ ਪਾਸਾ ਮਲਿਆ
ਸਿਧਾ ਕੇ ਪੁੱਠਾ
ਪੁੱਠਾ ਬਣ ਧਲਿਆ
ਹਿਸਾਬ ਵਿਚ ਦਲੀਆ
ਖਾਲੀ ਦਾਣਾ ਥਲਿਆ
ਭਰਪੂਰ ਭਾਣਾ ਚਲੀਆਂ
adha live _ead alive adhe
हमारा वेश तो सारा हरा है
तुम्हारा देस का भूखा घूरा भरा है
गोदी के अंदर ख़ाली द्वारा है
जो भी अंदर ख़ाली बैठे
ख़ाली मन ही उसका कुंवरा है
वोह समय काल के अंदर जीवित है
और यह समय आज के अंदर से गुजर रहा है
_h@ _ill adha do
wit()out
adhe breathing
d-i-d wit()in
emptee()ead adha
a()lon
भू-का प्यासा आधे कितना भरपूर भैभीत है तूतू में में की दुनिया की तूतू से
gut गोदी के ख़ाली शेर से कहो पूरा li-on
आधे बूंदियो के ख़ाली बैठने से कितनी जलन होती है भरपूर वेहले को
हर वक़्त gut सृष्टि को भरपूर नाम-आम (b_am )
आधे तो जैसे तो गोदी का भरपूर विनाश-व्या-कारन हो गया
तुम्हारा भगवन मूर्ति के अंदर ख़ाली है
gut मईया आधे की आँखों के अंदर ख़ाली रखने वाली रखवाली है
You must be logged in to post a comment.