भार ढो

भरपूर से अपना भार ढो नहीं होता


और गोदी की चिंटी को दाना उठाते

देख कर प्रेरणा मिलती है


एह कौन बातयेगा चींटी की टांगे

gut गोदी का ख़ाली घर-भार उठा

के संभलके के चलती है

भरपूर को तो यह भी नहीं पास्ता

यह क्यो अदर क्या है, ढोने से पहले

इकठा करना जरूरी है

un-a-war

आधे बूंदियो के ख़ाली बैठने से कितनी जलन होती है भरपूर वेहले को


हर वक़्त gut सृष्टि को भरपूर नाम-आम (b_am )


आधे तो जैसे तो गोदी का भरपूर विनाश-व्या-कारन हो गया