आधे कही भी रहे गोदी के अंदर रावा
सारी गोदी का पता पत्ता मावा
आधे गोदी का ख़ाली बावा
gut ज़मीन उगले आधे भरपूर लावा
आधे कही भी रहे गोदी के अंदर रावा
सारी गोदी का पता पत्ता मावा
आधे गोदी का ख़ाली बावा
gut ज़मीन उगले आधे भरपूर लावा
बस करो आधे
और नहीं वाह देह
gut गोदी को न मिला ख़ाली तेह
कौन भगाये भरपूर भय
रात-दिन न जगे ख़ाली लेह
आप ही करो ख़ाली मेह
जहां सूर्य की रौशनी नहीं
वहां है gut गोदी का अँधेरा ढूंढे
अंदर की ख़ाली रोहिणी का
सफेरा
कितने जन्मो के अंदर आधा
एक बलवान रहता है और
शुन्य जन्म में तो निर्बल ही मिलता है
शुन्य जन्म मिलता नहीं
gut गोदी के अंदर ख़ाली ढाल के
अपने आप शुन्य साँस
ढल जाता है
बलगाडी के पहीये बल का पीछा करते है
आधा ने ही तो बनायी थी
क्यों युग में कल
आज के
बैल के सींघ को भी नहीं छोड़ा
i _ood do
ever-y-thing in()id u
(& me)
for ha_f wit()in chi_d to
be af()aid of on half
भरपूर कितना के ख़ाली कम-आया
आधे की प-हेली जन्म की भरपूर अंत के ख़ाली अनंत से
गोदी की ख़ाली नौका नौरूर है
गोदी के लहरें ख़ाली लो-पूर्ण है
किसके मु-काम का चेहरा चूर है
देखो तो जरा गोदी के अंदर भरपूर है
_ll spec()es o-n this plan-et
_no _ow to giv b_r-th
& pro()ect _oung bab()ie
asur wit()in y in()id
u()eing is a not spec-ies
आधे तो gut की tot-al माँ(की)मूली है
इसी लिए गोदी की आग ख़ाली बबुली है
अंदर बाहर बोले ख़ाली आधे तो-तुली है
भीतर न समझे ख़ाली भू ति-तली है
आखे दिखाओगे तो ख़ाली की
भरपूर बिजली है
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