आधा जन्म का एक (आ-जा)ना तो आगा ही रहेगा
शुन्य gut का भु(आ-ला)ना भरपूर एक-एक को ख़ाली रुलाएगा
हर आधा जन्म में
आधा जन्म का एक (आ-जा)ना तो आगा ही रहेगा
शुन्य gut का भु(आ-ला)ना भरपूर एक-एक को ख़ाली रुलाएगा
हर आधा जन्म में
an in()id 0 re()ali_ation is de_th of भरपूर सास
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bi()th ख़ाली si-l()nce रास
गोदी मईया रा १ आया है
आधे ईतय से आदि आरणि आ
0 mae _is em()tee f()og
gut ब्रह्माण्ड की शुन्य देवियाँ क्या भगवन की माँ नहीं होती जो ख़ाली() माँ को वर-दान भरती
शुन्य देवियों को पूजते नहीं सांसो में समाते सा बिना समाय
तो यह भगवन तक पहुँच ही नहीं सकते
सारी दुयाये अंदर भरपूर भार
अदर के कम-रो के क()मो को भोगने आये हो
अदर के बाहर
तो की सृष्टि गोदी के अंदर को रोगो गे
सास की अपवित्रता से असुर
तुम(अदर)हारी की भरपूर कर-तू-तो मे का प-रदा
भरपूर मा-बाप से छिप सकता है
गोदी की ख़ाली आहों से नहीं
_h@ is or-i_inal _orm of _abi?
दुनिया मे कोई भी भगवन से बड़ा (neither – nor =) नही होता
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ख़ाली मईया की गोदी जैसे ख़ाली तो सारे ही सोने सा
और ख़ाली गोदी ही भगवन को ख़ाली -खती खा
इसी लिए भगवान सुरक्षित ख़ाली साक्षी सक्षम सा
mae ख़ाली हम_ili-tee _ring p_e_ce in()id u
तुम-हा-री | हम-आ-री
गोदी की अंदर की जोड़ी है कितनी -यारी
a भरपूर _other is bu_y in()id ho_se_old
_ork p_ating each सास का _ork
गोदी की छईया तो un-i-वर-s का ध्यान ही यही चखती
काल्की बिछाए ख़ाली आधे पालकी
दुल्हन की सृष्टि ख़ाली गो()का लाल की
डोली की ढाल अंदर ख़ाली लकीर धरो की
ख़ाली उठाए साँस का सौभाग्य चार कंधार की
भीतर ही तरी ख़ाली साँस उद्धार की
आधा झांके हाँजी हाँजी ख़ाली रजा उध्हार की
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