श्री काल्कि का उल्लेख तो हिन्दू धर्म में धारणा ही आधार मान्यता
गोदी का भरपूर अंधकार बांटने के लिये सास के दामाद को अदर फुरसत नही
और काल(मय)की की गोदी का नाम अपने अदर दहाड़ने के लिए
भरपूर फिस्सडी फन-डर अदर
श्री काल्कि का उल्लेख तो हिन्दू धर्म में धारणा ही आधार मान्यता
गोदी का भरपूर अंधकार बांटने के लिये सास के दामाद को अदर फुरसत नही
और काल(मय)की की गोदी का नाम अपने अदर दहाड़ने के लिए
भरपूर फिस्सडी फन-डर अदर
गोदी सांसो को दो()का दही दाती
आधे आली आतुर अभी आया आती
आत्मा के अच्छे-सच्चे सह सही सकते
अच्छी आदतों की भरपूर नुमा(फर-मा)ईश नाती नहीं नकते
तुम-हारे तू को घर के अंदर ख़ाली रसूल के असूल का नहीं पता
हमें क्या करना तुम-हरी भरपूर इधर उधर भरपूर सास के दामाद द-खता
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मईया ने हाथ बांधे बरखाया
माखन इधर उधर गुर्राया
साँस की तरेडों तो ताली
तिल्ली ताया तर्राया
अब सृष्टि गोदी में मईया ने खुद बाल शुनया बिंदु
को माखन खाने खो खिला ख़हे खा
तो भरपूर भ()ल-ज़ाम तो सास की तूतू मे मे ने
अपना भरपूर सिद्ध करने के लिए लगाए ला
अब इस सास सो सदगे इधर-उधर के ख़ाली डंडे
ना भूले भाली भेहेर अदर-बाहर भरपूर भंडे
गोदी के काल्कि को है ना इंतज़ार
सृष्टि की कोख का ख़ाली खल कख-वार
तुम-हारे अदर भरपूर त्रिकाल का अंत-कार
ना लौटाए अंदर तरपूर तरो ताली ताल तार
नही आया य-कीन भरपूर भहाली बे-हाल ब-हार
अकलिष्ठा-कलिष्टा
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वैराग्य ख़ाली वही वि-योग अदर भरपूर भाग्य
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गोदी में अंनगिणत अन्न-गणित ख़ाली आधे
सृष्टि की कल्पना कागे ख़ाली खागे
अनंन्त में लींन आरे-वारे न्यारे नागे
ख़ाली ध्वनि धे धींन धन्धु धा धागे
काल्कि आधे बिंदु द्वार दहि दौड़ा दायाँ
आधे बिंदु आमने सारा दिन आज ख़ाली खाया
ख़ाली माँ का रात काला आधा सामने साया
आँखों में खूह खुला खंड खरपूर खमाया
सारथी सा साथ सखाया ख़ाली समाया
पढ़ाई का बल मत पढ़()आई
और सास का दामाद कहा गया है धरने
i को बाहर खरीदने खैर खाते
भरपूर भक भर अदर भय-लाते
एक-एक ना समझ बाहर बाते
पूरे पैर पड़े ना इधर उधर प()ते
परपूर पढ़ पिगला गला गाते
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