ख़ाली सांसो का जहा()ज जी आधे आ घा()रा घर घा
आज कौन से ज़मीन-आसमान
मिलाने माया मय घेरा घा
गोदी आँखे ख़ाली खाम खेहती
एकांत न बोल सके वैसे सेहती
ऐसी शक्ति शांत-शाली शहती
माया मोह मोले मुख मा मेलती
ख़ाली सांसो का जहा()ज जी आधे आ घा()रा घर घा
आज कौन से ज़मीन-आसमान
मिलाने माया मय घेरा घा
गोदी आँखे ख़ाली खाम खेहती
एकांत न बोल सके वैसे सेहती
ऐसी शक्ति शांत-शाली शहती
माया मोह मोले मुख मा मेलती
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सृष्टि गोदी न पहचाने परपूर पुये
ज़ुबान जुड़े जरपूर जय जय जुये
आज इत-वार हा
सोने सी ईंट स्वार सा
भथोड़े भोहे भाव बीमार बा
कोई केक कदर करपूर कार का
कल की मै मै को पता चल ची चायोगा
आने वाला अदर तूतू भरपूर भूयेगा
बनती बारियो बे बरपूर बहकायेगा
एक बता दो बाटो बाहर बटवायेगा
अदर का अत भेक भा भुलायेगा
कलयुग का कर करपूर करायेगा
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no_ 0 _aim
in(out)id to()tal _y
no()thing cons_ant is nat_re of brea_h
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chan_e is ever-y-thing in()id u _ife
पेड़ो पी पढ़ाई पड़ने पे अंदर पाप पुण्य पास पटते
po_ed pu_ses p_un _ol p_at_on pac_ par_ing p@
i am 0 ho_ in()id full_ess _h@
it’s goo_ 2 b w_ong
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a _ol b_ing t_ue to y-0-s in()id u 0 ys-lf
rit _ow y-0-s in()id u _ar _esting
गोदी की मिट्टी के ऊपर राख
फिर भी इधर उधर भरपूर आख
अदर उगलाये बाहर बा बिलख विलाप
सास भारी भरपूर आसू छी छाप
तुम अंदर हमें नहीं जानते
तूतू मे मे का मौन मानते
इधर उधर नही रहते जागते
याद के यारपूर यही त्यागते
ज़ुबान का भतीजा कब तक भत्तीसी के भान से जुये जुड़ायेगा
हमारी आत्मज्ञान का दुःख तो सास ने अदर ही भरपूर आधा बिछा बखा बा
di_est 0s li_ s_un()a a_ain
do em()ting _ae no()thing
an em_tee foo_ 0 in()id d_ool
han_ed _an _ol s_ool
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