उज्जवल आला

आज से शुरू हुया हर जुबान का ताला
नही खुलेगा कलयुग का हिम्मतवाला
रखना अदर सास कदम कम काला

चाबी चाव चुप चढ़ी चार चाला

ख़ाली बहेगा अंदर का रूखा रखवाला

धरती की गोद हरी-आली आधे ज्वाला

chi_f

गोदी को नहीं कोई तकलीफ


इधर उधर खुद भटके शरीफ
दूयीया की भरपूर तशरीफ़
भरपूर साथ अदर भरपूर

चीफ