आधे एह क्या किया
जू जाल जाडनी थी
बाल बिकाल बया
कही किरा क्या
नजर नही नहाये
Category: innate
गुन-गुने
खै-रात खले खाल पल पले
रात उ-गले रूब-रु रले
दिन दोगुने दो दवार दले
कौन रु रहर आम मन मिले
आदि आली
आधा काली आधे निराली
प्रदान-आदान ख़ाली खवाली
ड()डू
आधे लद्दू लाल लाया
आधा निगला नाड ना()या
बाहर इधर पछ-ताया
अदर उधर पच-काया
त-रैड तूती तय तलाया
ओछा अचा
गोदी में
ख़ाली और भरपूर की
पूछ नीच नही नाम नाती
ख़ाली खल खहि खकता
भरपूर बल बही बकता
नयी दुयिया
गोदी के कलयुग में कितनी देर तक
एक दुयीया भगदड भरपूर बहती बा
जितने दुयिया के अदर देरी दी दवा
अच्चुतम अनजल
आने वाला है ख़ाली कल
बने आज का ख़ाली जल
गोदी में ख़ले खरूर निर-जल
बूँदिया अंदर आरे ऊज्ज़वल
सासो के अदर
सृष्टि मईया की
शक्ति को दबाते हो
तो गोदी बत्तियायेगी
बैठा है आधे समाधी में
होती है आबादी
आधा आधे
ख़ाली आदि
पाम पिवाला
भरपूर मौज मस्ती भरपूर आराम
आधा आस-पास ३ पहर परम पवन -ज्ञान
आधे न मिला दो दक़्त दा दिवा-ला दान
काटो काटो
पता तो पले नवाब ने नाम न नले
पेड़ो का भविष्य आज का शिष्य
काट के कारा गाठ गा गारा द्रिश्य
क्यो कही का भविष्य भरो
भरिया()ली का भिकता विश्या

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