हमारे पास रहने को नहीं छत
खुलेआम बैठे बोदी बना ()बत
दिन में इधर उधर डबाव डट
रात को क्या कहे करुणा कट
Category: innate
रात रात रात
हमें नहीं चाहिए दूयीया की दडदूर दात
जो गोदी के दिन रात रुलाये अंदर ग्वाये गात
वो है अपने अदर भरपूर भू-बान भात
बांधो बोरिया बिस्तर आधे अत आत
आधे न निकले गोदी से बाहर बात
ढूंढते रह रहायोगे ख़ाली खो -रात
किसे क्या
कल की चांदी ना कुलाये काल की कटी कंगी
केसो की कमी कमाये काल की कमली
किसे कायदा
भरपूर सच की एक इज़्ज़त बाहर आती
और सौ गाठो के गठजोड को अदर कुरेदती
ख़ाली में क्या कम और क्या ज्यादा
te
an em_tee temple within darcness is aum_tea ample
बूँदी बहार
गोदी को है इंतज़ार
तो सोयो सारे तरो त्यार
बुँदियाँ बादशाह बढ़ा बहार
दिन रात खिसके ख़ाली
ओहि आम आरा आहार
p_i-mo()di-al
1 _rim 0 di_is_ible in()id c_ime
ever-y-t_ing be_ins y-0-s in()id u in()s_inc_ive li_t
0_ing en_s in dar_ in-2i-tion di_t
ਖਾਲੀ ਖੜੋ
ਆਖਾ ਦੀ ਉੱਚ ਨੀਚ ਨਾ ਨਰੋ
ਖਾਲੀ ਖਵਾ ਖਿਲ ਖਹਿ ਖੜ੍ਹਦਾ
ਦਿਲ ਦੀਆ ਢਾਲਾ ਢਾਲਿ ਢਰਦਾ
ਦਿਲ ਨਹੀਂ ਕਦੀ ਅੰਦਰ ਭਰਦਾ
सिरा सिल
सफ़ेद सियाल सिले सालो-सालो सवा साल सुलाए साल
दिल दरिया
दिल से प्यार की उम्र पूछते हो
उम्र के आयने कहा छुपा के रखते हो
दिन जिसे ढूंढे रात रही पाए
मिले न आए आन मिले जाए

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