सृष्टि गोदी के अंदर आधे घर के
अंदर के भरपूर (e)नाम
अपाहिज
बंजारन
अनाथ
सृष्टि गोदी के अंदर आधे घर के
अंदर के भरपूर (e)नाम
अपाहिज
बंजारन
अनाथ
देवी मन की बंद आँखों से सब देखती
इसी लिये गोदी में दिन दहाड़े
खुले-आम चोरी चोरी चाढे
रात कहा रह आयी आडे
तर-सती ताखे स-लाखे
सूखी धरती पे नहीं उगेगा अन्न
दूयीया के एक एक की भरपूर
कोख भी सूखी _a_ch भूख भरेगी
घर के अदर जन न भरपूर बाहर जन
कौन से समाज के मा-बाप को अपने
घर के अदर के बचो से उम्मीदे आती है
हाँ अंदर के बच्चे तो कभी बाहर निकलते ही नहीं
किसकी कैद में ही आधा जन्म जलते
a within aum()tea breath
( सृष्टि मईया की गोदी )
is
to()tal grounded em_tee in(out)id 5-senses
a wiw o presence
जिसकी ()रथी आसमान से उडे
वह क्या ज़मीन के अंदर से गिरे
ढूढते रह आओगे भरपूर सिरसिले
कौन से आधा जन्म जान जय जले
सजना साज सुदर सालो सिले
ख़ाली सूर्य की गर्मी से पिघला
जिन जिन आँखों ने सांसे ऊ-गला
हमारी धारो ने आस(ख़ाली)मान खि()ला
गोदी के मज़धारो ने ज़मीन ज़िग()ला
ख़ाली लती लकड़ी पे सटी सास गुस्सा गाया
बुँदिओ का ख़ाली आरो आड़े आम आया
देखो दो दया दाम दवा दम-दार दाया
अब किसे लूटे न लोट लाडा लहराया
अब गोदी का ख़ाली आपा-hiz
तो दूयीया की एक-एक सास का इधर-उधर का आपा
खारेगा ख़ाली आधा जन जन अंदर नापा
no _eet no g_eet
adhe is to()tal
em_tee fee_
You must be logged in to post a comment.