आज आधा सूखा पडा पेड है
तो इसका बलमत
सृष्टि गोदी आधे
धोखा डेढ़ है
नहीं नहीं ढ़ाई
स्वा सेर है
आज आधा सूखा पडा पेड है
तो इसका बलमत
सृष्टि गोदी आधे
धोखा डेढ़ है
नहीं नहीं ढ़ाई
स्वा सेर है
हमारी गोदी गा गहना ग()य
भर भर भे भेटते अदर भय
और बाटते बाहर बाया बाय बय
सेसा ससुर-सास सा सूरा सहना
कितने पोते दोहते है तुम-हैरी सास के
आधा जन्म के एक-एक मिला के होगे
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तुम पाप का मल-मूत्र त्याग हर रोज क्यों नहीं करते
ध्यानी की हमें म्यानि की साँस समाने साथि सौ
तुम रात रही रह रह दस्ते
जिसको हराते है वोह क्या डरता डय
बूँदियो को मारे हा(र)का ध(क)रता धय
अदर बाहर जमाये जाल जय जय
मेल मिलयो माला मैल मय
ख़ाली सांसो के अंदर सम्पूर्ण शांति
जिसके ऊपर-निचे आमने-सामने इधर-उधर अंदर-बाहर
नहीं खड़ी हो सकती बटी हुई आधा जन्म की एक शक्ति
ऊपर का नीचे का
विनाशकाले विपरीतबुद्धिः
जिस ध्यान से घर के अंदर mic-ro gut की
पाचनशक्ति की विपत्तियों को दूर किया जाता है
उसी तरह सृष्टि गोदी की शक्ति अंदर m-ac_ro gut
के ध्यान से विपरीत बुद्धि को नष्ट करती है
सबसे पहले अपने अंदर के ध्यान को ख़ाली करे
ताकि ध्यान को पता हो धार किसे काट रही है
चोट तो लगेगी ही काटने से
उस चोट का क्या फायदा जो
अदर सास को बाट के बाहर बटे
देवी ने बताया भोलेनाथ को
गणेश पुत्र का जन्म हुआ
इसीलिए भोलेनाथ ने आते ही
पुत्र पा गहना गिरा दिया
जो देवी की ख़ाली विद्या का अपमान करे
वोह आधा जन्म घर घर बदनाम भरे
भो-ले()नाथ gut में ही बैठे है
आधे अंदर इज़्ज़त क्या होती है
भरपूर पैरो तले रोलती
ख़ाली माँ की गोदी की मिट्टी
वास्तु शास्त्रा के अनुसार
सृष्टि गोदी के अंदर
हर वस्तु को मोल
अन्न के बराबर का बोल
और असुरो के नसीब मे
दु()रूप-योग का भोग
भुलाया अदर का भोल
सृष्टि मईया की गोदी
न तो देवो की होती हो और न ही असुरो की
आधा बाहर कहर और आधा अंदर जहर
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