नली नली

मुरझा गयी कंस की कली
हम क्या करे रात न रली
आधा ढेर ढाल गली गली
छाया छे अधेरे डली डली

वीरावती कहती अपने बच्चो को
अब
काली कुण्डी कगालो काली

आधे आम आये

कुछ ()नाम जो जह जये
आधे क़ब्र के कंधार कह कहे

मरी हुई (बेटी, बहन, मां, स्मा(दा)ज) सहे साये

जिसके अंदर किसी को नज़र नहीं नाये

सृष्टि गोदी गी गृह()स्थी आली आम आये