गले में गोदी गी घड़िआल की घण्टी नहीं बांधते
ताकि गोदी की साँस सी आँख खुले पता पा पलटे
गले में गोदी गी घड़िआल की घण्टी नहीं बांधते
ताकि गोदी की साँस सी आँख खुले पता पा पलटे
गोदी के अदर सास ने जुबान की जू उडायी
आधा जन्म के करपूर कीटानु कान काट कडायी
ले सास अब तेरी तरपूर तदर तवायी
तेरे तो ती तली तेरी ताटी
मुरझा गयी कंस की कली
हम क्या करे रात न रली
आधा ढेर ढाल गली गली
छाया छे अधेरे डली डली
वीरावती कहती अपने बच्चो को
अब
काली कुण्डी कगालो काली
अरे एह आने आ अहा आ
आधा अंदर आधे बाहर
बिंदी बिसरी बिली
गोदी से गहर गहि गाता
आत्मज्ञान की हत्या से मुक्ति की आँख नही खुलती
is th@ co_ing f_om deep wi-thin
दुयिया-समाज मुक्ति
an em_tee _ut im_un_tie
0 en_o_ed in()id @ all
for no 1 _as ho_
priv(y)il()ge
in(out)id सख्ती
खाली अनु अंदर खाली मईआ
परमा(अ)णु पु()वईआ
परम()नन्द पईआ
emp_tee 1 _urn 2 1/2 _ies
here co_es 3rd cal_ 1/2 c_ies
कुछ ()नाम जो जह जये
आधे क़ब्र के कंधार कह कहे
मरी हुई (बेटी, बहन, मां, स्मा(दा)ज) सहे साये
जिसके अंदर किसी को नज़र नहीं नाये
सृष्टि गोदी गी गृह()स्थी आली आम आये
आधे is res()ting wi-thin aum()tea स()बर
in()id em_tee कब()र
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