बुँदियो को पता है आधे साँसे
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जगी ज्योतिः
दो वक़्त का ख़ाली नि(वा)ला
चोड़ो चुनौती
बुँदियो को पता है आधे साँसे
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जगी ज्योतिः
दो वक़्त का ख़ाली नि(वा)ला
चोड़ो चुनौती
सुना मईया गोदी का दिन देखना है
हम नही दिखाते-दिखाने के खाते गोदी का
दिन रात आमने सामने कहां आते
गोदी के नियमों का कैसे करते पालन
घर के अंदर बुँदियो औ का ख़ाली संचालन
दिन रात निखरे साँसो का कर्त्तव्य ख़ाली खालन
तुमने हमारी मरी हुई लात पापी पेट पे मारी
तुम तो हो घर के अदर बीमारी
समाज की यारिया प्यारी
एक su-दर क्या क्यारी
तुम तो करते घरो के अदर बुँदियो का ब्ला()कार
और बाहर करते वास के घरो का शिकार
खुली नजरे न हटे बडा मै घर समझदार
बेजुबाँ नही डालते गोदी में जुबान
बाहर निकालने का गंद
तुम्हे तुम-हारे भरपूर क()मो की दिन की सोच
ही रास्ता दिखाती घरो की रात के अदर
गोदी में कोई रास्ता दिन-रात रही रुक(तरा)ता
हमारा हक हरा हारा हर्रा
गोदी मईया ने जो दिया दर्रा
तुमने खुद ही ठुकराया ठर्रा
आज भी किसी को कारा कर्रा
किसे निभाये जारी जर्रा जर्रा
मा की कोख से पैदा हुआ
भरपूर कंस और खाली कस
भरपूर मिला समाज सा शोषन
और खाली खिला गोदी रोशन
गोदी करती पालन पोषण खाली बच्चो का
सास का शाह-शोषन सलता समाज के
अदर भरपूर बचो बा
एह क्या आधे
बिंदी तो दायी में ही छूट गई
रहने दो पिसे पता पला
चार दिन मे कमरा काली
चार दिन मे क्या होता है
जो एक रात मे नही होता
रात मे कोई एक कहा होता
सब पता होता
शाति बायी शख्सियत-शाली
मै हू इस कमरे की घर-वाली
भरपूर आधा बाहर रख-वाली
मै ही लाती आधा घर खुस(र)हाली
आधे गोदी में कहां निकला कहां वापस आया
इसका तो घर वालो ने अदर नही भरा किराया
अब ढूढते रहो इधर उधर करपूर कुया फिर आया
ख़ाली आत्माज्ञान ही ख़ाली गोदी का
खरपूर खौफ
सहता-कहता
आधे ख़ाली धर्मो के फल की इच्छा
अंदर आन अड़ो
वस्सू राजे आधे मईया का ख़ाली खालान स्थर सारदो
मईया हमसे ननु नमी न्योता
ध्यान धरो तुर्य्य अणु-पुत्र
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